
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गन्ना किसानों की आय बढ़ाने और राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए एक साहसिक और दूरदर्शी कदम उठाया है। पेराई सत्र 2025–26 के लिए गन्ने के राज्य परामर्शित मूल्य में ऐतिहासिक वृद्धि केवल संख्याओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मुख्यमंत्री की किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की स्पष्ट नीति का प्रतीक है।
पिछले वर्ष अगेती प्रजाति का मूल्य ₹375 और सामान्य प्रजाति का मूल्य ₹365 प्रति कुंतल था, जबकि इस वर्ष इन्हें क्रमशः ₹405 और ₹395 प्रति कुंतल निर्धारित किया गया है। यह वृद्धि सीधे तौर पर किसानों की आय में इजाफा करेगी और उनकी मेहनत का उचित सम्मान सुनिश्चित करेगी। इसके साथ ही यह निर्णय राज्य के कृषि परिदृश्य को मजबूती प्रदान करता है और गन्ना उत्पादन को प्रोत्साहन देने में सहायक होगा।
मुख्यमंत्री धामी ने मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया में सहकारी, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की चीनी मिलों, गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग, किसान संगठनों और अन्य हितधारकों के साथ विस्तृत विमर्श किया। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित एफ.आर.पी., उत्तर प्रदेश में प्रभावी गन्ना मूल्य तथा राज्य की भौगोलिक और कृषि परिस्थितियों का समुचित विश्लेषण कर संतुलित और न्यायपूर्ण निर्णय लिया। यह दिखाता है कि मुख्यमंत्री केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं लेते, बल्कि गहरी सोच और व्यापक दृष्टिकोण के साथ रणनीतिक रूप से निर्णय लेते हैं।
सिर्फ मूल्य वृद्धि ही नहीं, मुख्यमंत्री ने यह सुनिश्चित किया कि क्रय केंद्रों पर किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और भुगतान समय पर और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराया जाए। यह कदम मुख्यमंत्री धामी की किसान-केंद्रित नीतियों और उनके दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।
गन्ना किसानों के लिए यह ऐतिहासिक बढ़ोतरी राहत का संदेश है और राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देने वाला है। यह निर्णय न केवल वर्तमान किसानों को लाभ देगा, बल्कि आने वाले वर्षों में गन्ना उत्पादन और कृषि विकास में सकारात्मक बदलाव लाने में मददगार सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री धामी की इस नीति से स्पष्ट होता है कि वे न केवल आज के किसानों के हित में काम कर रहे हैं, बल्कि भविष्य की कृषि सशक्तिकरण और आर्थिक समृद्धि की दिशा में भी दूरदर्शी दृष्टि रखते हैं।
यह कदम उनके विजन और नेतृत्व की मिसाल है—एक ऐसे नेतृत्व की जो किसानों को सशक्त बनाता है, उनकी मेहनत का सम्मान करता है और उत्तराखण्ड की कृषि अर्थव्यवस्था को स्थायित्व और मजबूती प्रदान करता है।






