प्रोटोकॉल से पहले पीड़ा, जमीन पर बैठकर मासूम के परिवार का दर्द बांटते डीएम प्रतीक जैन

SHARE:

देवभूमि में जब सत्ता सिर्फ फाइलों और मीटिंगों तक सिमट जाए तो जनता उसे सरकार नहीं व्यवस्था कहती है, लेकिन जब वही सत्ता दुख की घड़ी में जमीन पर बैठ जाए तो वह भरोसा बन जाती है। रुद्रप्रयाग के सिंद्रवाणी गांव में 5 वर्षीय मासूम दक्ष को गुलदार ने छीना, यह सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि सिस्टम की संवेदनशीलता की असली परीक्षा थी। उस परीक्षा में जिलाधिकारी प्रतीक जैन अफसर नहीं बल्कि एक संवेदनशील इंसान बनकर खड़े दिखे। न कोई मंच, न कुर्सी, न कैमरे की बनावटी मुद्रा,पीड़ित परिवार के आंगन में जमीन पर बैठा प्रशासन, यही असली सुशासन की तस्वीर है।
आज जब अफसरशाही पर यह आरोप आम हो गया है कि वे जनता से कट चुके हैं, ऐसे समय में डीएम का यह कदम बता देता है कि मजबूत नेतृत्व केवल आदेश देने से नहीं, दर्द समझने से पैदा होता है। यह कोई इवेंट नहीं था, न ही सहानुभूति का दिखावा,यह उस प्रशासनिक सोच का परिणाम है जो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के “संवेदनशील सरकार” मॉडल से निकली है। जहां मुख्यमंत्री आपदा में खुद हेलिकॉप्टर से उतरते हैं, वहीं जिलाधिकारी प्रोटोकॉल उतार कर जमीन पर बैठते हैं।
घोषणाएं भी कागज की नहीं बल्कि जमीन से जुड़ी हुई दिखीं। दस लाख की सहायता सिर्फ आंकड़ा नहीं बल्कि टूटे परिवार के लिए सहारा है। आवास, विस्थापन, छात्रवृत्ति, पेंशन—ये सब योजनाएं तब सार्थक होती हैं जब सही समय पर, सही व्यक्ति तक पहुंचें। गुलदार की धरपकड़ के लिए पिंजरे, ट्रैप कैमरे, विशेषज्ञ,यह बताता है कि प्रशासन हादसे पर रोता नहीं, समाधान पर काम करता है। सोलर लाइट, झाड़ियों का कटान, फेंसिंग,ये छोटी दिखने वाली बातें ही गांव में सुरक्षा का बड़ा फर्क पैदा करती हैं।
यह पूरा घटनाक्रम एक बात साफ करता है,उत्तराखंड में अगर सरकार मजबूत दिख रही है तो इसलिए नहीं कि बयान तेज हैं, बल्कि इसलिए कि सिस्टम संवेदनशील है। मुख्यमंत्री धामी का मजबूत राजनीतिक नेतृत्व और डीएम प्रतीक जैन जैसे अधिकारियों की जमीन से जुड़ी प्रशासनिक कार्यशैली मिलकर वह भरोसा बना रही है, जिसकी आज सबसे ज्यादा जरूरत है। इस एक तस्वीर में पूरा संदेश छुपा है,जब अफसर जमीन पर बैठता है, तब ही व्यवस्था जनता के दिल में खड़ी होती है।

Khushi
Author: Khushi

Leave a Comment

सबसे ज्यादा पड़ गई