
यह बैठक दरअसल फाइलों की नहीं, फ़ैसलों की बैठक थी। लंबे समय से देहरादून–मसूरी शहरी क्षेत्र जिस अव्यवस्था, अवैध निर्माण और ढीली निगरानी का बोझ ढो रहा था, उस पर अब सिस्टम के स्तर पर पकड़ बनती दिख रही है। एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने इस पूरी कवायद में खुद को सिर्फ एक प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि शहरी अनुशासन के स्ट्रक्चर आर्किटेक्ट के रूप में स्थापित किया है।
मानचित्र स्वीकृति प्रणाली पर उनका फोकस साफ संकेत देता है कि अब “चल जाएगा” वाला दौर खत्म हो रहा है। समयबद्ध, पारदर्शी और नियम आधारित स्वीकृति का मतलब है—ईमानदार नागरिक को राहत और नियम तोड़ने वाले को असहजता। यही फर्क एक सामान्य प्रशासक और मजबूत आईएएस अधिकारी में होता है।
शुल्क न जमा करने वाले प्रकरणों पर समिति गठन और कार्रवाई का निर्देश यह दिखाता है कि तिवारी किसी भी स्तर पर समझौते के मूड में नहीं हैं। न नाम चलेगा, न रसूख। यह संदेश सिस्टम के भीतर भी गया है और बाहर भी—कि नियम अब सलाह नहीं, आदेश हैं।
अवैध निर्माण और प्लॉटिंग पर सेक्टरवार संयुक्त अभियान, और कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक वेबसाइट पर डालने का निर्णय, प्रशासनिक पारदर्शिता का वह मॉडल है जिसकी अक्सर बातें होती हैं, लेकिन ज़मीन पर कम ही दिखता है। यह कदम सीधे उस माफिया तंत्र पर वार करता है जो अंधेरे में फलता-फूलता है। रोशनी पड़ते ही उसका खेल खत्म होता है।
विकास को सिर्फ सीमेंट और सरिया तक सीमित न रखकर हरियाली, पार्क, लाइटिंग, पैदल यात्री सुविधा और धार्मिक-सांस्कृतिक स्थलों से जोड़ना यह बताता है कि बंशीधर तिवारी की सोच फाइल-केंद्रित नहीं, नागरिक-केंद्रित है। सहस्त्रधारा ट्रेंचिंग ग्राउंड को आधुनिक पार्क में बदलने की योजना हो या धर्मपुर चौक के पास पार्क और शिव प्रतिमा की परिकल्पना—यह शहरी विकास को मानवीय चेहरे के साथ आगे बढ़ाने का संकेत है।
लैंड पूलिंग और आवासीय योजनाओं को तय समय-सीमा में जमीन पर उतारने के निर्देश यह साफ करते हैं कि घोषणाएं अब सिर्फ भाषणों तक सीमित नहीं रहेंगी। डेडलाइन तय है, जिम्मेदारी तय है।
कुल मिलाकर यह तस्वीर एक ऐसे आईएएस अधिकारी की है जो सत्ता के विज़न को जमीन पर उतारना जानता है, और सिस्टम को ढीला नहीं, टाइट रखना उसकी कार्यशैली का हिस्सा है। बंशीधर तिवारी का यह अप्रोच बताता है कि अगर प्रशासन मजबूत इरादे से चले, तो “विज़न से विज़िबल डेवलपमेंट” सिर्फ नारा नहीं, हकीकत बन सकता है।







