
मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण (एमडीए) में कथित रिश्वतखोरी और दुर्व्यवहार के आरोपों को लेकर भाजपा के युवा नेता विपुल त्यागी (बहेड़ी) ने प्राधिकरण कार्यालय परिसर में धरना शुरू कर दिया है। अपनी ही सरकार में भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोलने से जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपुल त्यागी का यह कदम उन्हें एक मजबूत, निडर और जनपक्षधर नेता के रूप में स्थापित कर रहा है।
धरने पर बैठे विपुल त्यागी ने आरोप लगाया कि विकास प्राधिकरण में आम नागरिकों के काम बिना “सुविधा शुल्क” के नहीं हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि फरियादियों के साथ न केवल आर्थिक शोषण किया जा रहा है, बल्कि उनके साथ दुर्व्यवहार भी हो रहा है। “जब तक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होगी, मेरा संघर्ष जारी रहेगा,” उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा।
उनका कहना है कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ है जो आम जनता को परेशान करती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शिकायतों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को जनआंदोलन का रूप दिया जाएगा।
धरने की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने विपुल त्यागी से वार्ता कर निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया। हालांकि, धरना जारी है और अब पूरे जिले की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
गौरतलब है कि विपुल त्यागी इससे पहले भी आईपीएल शुगर मिल रोहाना और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान के खिलाफ मुद्दे उठाकर चर्चा में रह चुके हैं। वे लगातार जनहित के सवालों को मुखरता से उठाते रहे हैं, जिससे उनकी पहचान एक बेबाक और निर्भीक युवा नेता के रूप में बनी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि एमडीए में भ्रष्टाचार के आरोप सही हैं तो यह बेहद गंभीर मामला है और पारदर्शिता के लिए सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। कई नागरिकों ने विपुल त्यागी के इस कदम को “जनता की आवाज” बताया है।
मुजफ्फरनगर की राजनीति में यह घटनाक्रम एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। जिस तरह से विपुल त्यागी ने सीधे भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई है, उससे वे जिले की राजनीति में एक मजबूत और प्रभावशाली नेतृत्व के रूप में उभरते नजर आ रहे हैं।
फिलहाल धरना जारी है — और यह संघर्ष केवल एक कार्यालय के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार की मांग का प्रतीक बनता जा रहा है।







