
देहरादून से बड़ी खबर… जिला प्रशासन का जनदर्शन अब महज औपचारिकता नहीं, बल्कि “ऑन द स्पॉट एक्शन” का मॉडल बनता दिख रहा है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने साफ कर दिया है कि शिकायतें सिर्फ सुनी नहीं जाएंगी, उनका समाधान भी यहीं से तय होगा।
163 शिकायतों के बीच सबसे बड़ा संदेश यह रहा कि प्रशासन संवेदनशील भी है और सख्त भी। डालनवाला की विधवा सुनीता को आर्थिक तंगी में तुरंत रायफल क्लब फंड से सहायता और विधवा पेंशन स्वीकृत करना बताता है कि डीएम मानवीय मामलों में देरी नहीं चाहते। वहीं रेसकोर्स के बुजुर्ग दंपति को बेटों द्वारा घर से निकाले जाने पर मौके पर भरण-पोषण अधिनियम के तहत वाद दर्ज कराना,यह संकेत है कि परिवारिक उत्पीड़न अब निजी मामला नहीं, कानूनी मामला बनेगा।
पुलिस पब्लिक स्कूल की शिक्षिका की शिकायत पर तीन दिन में जांच रिपोर्ट तलब करना प्रशासनिक सख्ती का उदाहरण है। छरबा में अवैध अतिक्रमण पर समिति गठन, घटिया सड़क निर्माण पर जांच, बिना दस्तावेज लोन देने वाली फाइनेंस कंपनी पर विधिक राय,ये फैसले दिखाते हैं कि डीएम सिस्टम को जवाबदेह बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
सबसे अहम बात,जनदर्शन में 5 से अधिक भरण-पोषण वाद दर्ज और ऑनलाइन प्राथमिकी की पहल यह बताती है कि अब शिकायत को फाइल में दबाने का दौर खत्म हो रहा है।
मतलब साफ है,सविन बंसल प्रशासनिक तौर पर “रिएक्टिव” नहीं, बल्कि “प्रोएक्टिव” मॉडल पर काम कर रहे हैं। अगर यही रफ्तार और फॉलोअप जारी रहा तो देहरादून में जनदर्शन भरोसे का मजबूत प्लेटफॉर्म बन सकता है। फिलहाल संदेश स्पष्ट है,डीएम एक्शन मोड में हैं और सिस्टम को भी उसी लाइन पर ला रहे हैं।







