
श्री महाकालेश्वर मंदिर में संध्या आरती और शयन आरती की बुकिंग को पूरी तरह ऑनलाइन करना प्रशासनिक दृष्टि से बड़ा और समयानुकूल फैसला है। अब तक ऑफलाइन व्यवस्था में सिफारिश, भीड़ प्रबंधन और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। प्रति श्रद्धालु 250 रुपये शुल्क तय कर इसे एक नियंत्रित और दस्तावेज़ीकृत प्रक्रिया में लाने की कोशिश साफ दिखाई देती है।
दोपहर 12 बजे से संध्या आरती और शाम 4 बजे से शयन आरती की बुकिंग खोलने का समय निर्धारण भीड़ को चरणबद्ध तरीके से विभाजित करने की रणनीति हो सकता है। इससे सर्वर लोड और एक साथ उमड़ने वाली भीड़ को तकनीकी रूप से संभालना आसान होगा। हालांकि, असली परीक्षा वेबसाइट की तकनीकी क्षमता की होगी—त्योहारों और विशेष अवसरों पर लाखों श्रद्धालु एक साथ लॉगिन करेंगे, तब सिस्टम की स्थिरता ही पारदर्शिता की असली कसौटी बनेगी।
250 रुपये शुल्क को लेकर दो तरह की प्रतिक्रियाएँ संभव हैं। एक पक्ष इसे सुव्यवस्था और भीड़ नियंत्रण की कीमत मानेगा, तो दूसरा पक्ष इसे आस्था पर आर्थिक परत चढ़ाने के रूप में देख सकता है। सवाल यह भी है कि क्या वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों या आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए कोई विशेष प्रावधान होगा? यदि नहीं, तो आगे चलकर इस पर बहस तेज हो सकती है।
सकारात्मक पक्ष यह है कि ऑनलाइन बुकिंग से दलाल तंत्र पर रोक लगेगी, रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा और विवाद की स्थिति में डिजिटल ट्रैकिंग संभव होगी। नकारात्मक पक्ष यह कि डिजिटल साक्षरता से दूर ग्रामीण या बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए यह व्यवस्था चुनौती बन सकती है।
कुल मिलाकर यह निर्णय आधुनिक प्रबंधन और धार्मिक आस्था के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है। यदि तकनीकी ढांचा मजबूत रखा गया और सामाजिक समावेशन के उपाय जोड़े गए, तो यह मॉडल देश के अन्य बड़े मंदिरों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।







