
हरिद्वार में दो वर्षीय बच्ची के अपहरण के मामले में जिस तेजी से कार्रवाई हुई, उसने साफ कर दिया कि नेतृत्व यदि मजबूत हो तो नतीजे भी तेज आते हैं। सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह ने कमान खुद संभाली और ऑपरेशन को महज औपचारिक निर्देशों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि ग्राउंड लेवल मॉनिटरिंग के साथ स्पष्ट टारगेट तय किया,बच्ची की सकुशल बरामदगी।
पांच संयुक्त टीमों का गठन, बॉर्डर सीलिंग जैसा अलर्ट, बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों पर सघन चेकिंग, साथ ही मैन्युअल पुलिसिंग और डिजिटल साक्ष्यों का समानांतर उपयोग,यह दर्शाता है कि रणनीति बहुस्तरीय थी। अपराधी पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की नीति भी सफल रही, जिसका परिणाम यह हुआ कि बच्ची को चार घंटे के भीतर ऋषिकुल चौक के पास छोड़ना पड़ा।
यह घटना केवल एक रिकवरी नहीं, बल्कि संदेश है कि पुलिस की सक्रियता अपराधियों की योजना को ध्वस्त कर सकती है। तेज निर्णय, टीम समन्वय और तकनीक के उपयोग ने साबित किया कि कप्तान यदि जांबाज़ और परिणाम केंद्रित हो, तो पुलिसिंग का असर जमीन पर दिखता है। अब अपहरणकर्ता की तलाश जारी है, लेकिन शुरुआती ऑपरेशन ने स्पष्ट कर दिया है कि जिले में कानून-व्यवस्था पर सख्त निगरानी है और संवेदनशील मामलों में ढिलाई की कोई गुंजाइश नहीं।






