
राजधानी देहरादून में कानून-व्यवस्था को लेकर जिस तरह की सख्ती दिखाई दे रही है, वह सीधे तौर पर आईपीएस अधिकारी परमेंद्र डोभाल की कार्यशैली को दर्शाती है। एसएसपी के रूप में उनका संदेश बिल्कुल दो टूक है, अपराध करोगे तो धरती भी कम पड़ जाएगी। यह केवल बयानबाज़ी नहीं, बल्कि ज़मीनी कार्रवाई से साबित होता नजर आ रहा है।
पलटन बाजार और घंटाघर जैसे व्यस्त इलाकों में खुद पैदल उतरकर निरीक्षण करना बताता है कि वह फाइलों के भरोसे पुलिसिंग में विश्वास नहीं रखते। भीड़भाड़ वाले बाजारों, मुख्य चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की विजिबिलिटी बढ़ाने के निर्देश केवल सुरक्षा की औपचारिकता नहीं, बल्कि अपराधियों के मन में मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति है। जब वर्दी सड़क पर दिखती है, तो अपराध की नीयत अपने आप कमजोर पड़ती है।
डोभाल ने स्पष्ट कर दिया है कि पीक ऑवर्स में अधिकारी खुद मैदान में रहेंगे, शाम के समय नियमित पैदल गश्त होगी और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ मौके पर कार्रवाई होगी। यह संकेत है कि राजधानी की पुलिस अब रिएक्टिव नहीं, बल्कि प्रो-एक्टिव मोड में काम कर रही है। छोटी लापरवाही से लेकर बड़े अपराध तक,हर स्तर पर निगरानी कड़ी की जा रही है।
मुख्य बाजारों और फुटपाथों पर अतिक्रमण हटाने के लिए नगर निगम के साथ संयुक्त अभियान और बेतरतीब वाहन खड़े कर आवागमन बाधित करने वालों पर सख्त चालानी कार्रवाई यह दर्शाती है कि उनका दृष्टिकोण केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं, बल्कि शहर को अनुशासित और व्यवस्थित बनाना भी है। क्योंकि अव्यवस्था ही अक्सर अपराध की जमीन तैयार करती है।
तेज-तर्रार छवि वाले इस आईपीएस अधिकारी की सबसे बड़ी ताकत है,लगातार खुद मॉनिटरिंग। थाना, चौकी और सर्किल स्तर तक स्पष्ट निर्देश हैं कि ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी। अपराधियों के लिए संदेश साफ है,कानून से टकराने की कोशिश की तो कार्रवाई इतनी सख्त होगी कि बचने की कोई जगह नहीं बचेगी।
राजधानी में पुलिस की सक्रियता, मैदान में मौजूदगी और सख्त प्रशासनिक पकड़ यह संकेत दे रही है कि आने वाले समय में अपराधियों के लिए देहरादून आसान ठिकाना नहीं रहेगा। कानून का डर और जनता का भरोसा,इन्हीं दो स्तंभों पर एसएसपी परमेंद्र डोभाल अपनी पुलिसिंग की मजबूत इमारत खड़ी करते नजर आ रहे हैं।








