
जब धर्म का मंच राजनीति की भाषा बोलने लगे और राजनीति धर्म की वेशभूषा पहनकर घूमने लगे तब भ्रम पैदा होना स्वाभाविक है। आज जिस तरह की शिकायत सुनाई देती है कि जो किसी दल का एजेंट नहीं बनेगा उसे कुचल दिया जाएगा वह केवल भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं बल्कि हमारे समय की विडंबना का आईना है। संत की वाणी यदि सत्ता के पक्ष या विपक्ष की प्रेस विज्ञप्ति जैसी लगने लगे तो प्रश्न उठेंगे ही।
सनातन परंपरा का मूल भाव किसी दल विशेष की विचारधारा से ऊपर रहा है। शंकराचार्य परंपरा का उद्देश्य अद्वैत का प्रकाश फैलाना था न कि दलों के बीच वैचारिक पोस्टर बनना। व्यासपीठ ज्ञान की पीठ है और राजसिंहासन शासन की व्यवस्था का केंद्र। दोनों का संबंध मर्यादा से है परंतु दोनों का विलय नहीं। जब व्यासपीठ राजगद्दी की परछाई बनने लगे या राजगद्दी व्यासपीठ को अपने रंग में रंगने लगे तब संत और कार्यकर्ता के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है।
संत वह है जो सत्ता को दिशा देता है न कि सत्ता से दिशा लेता है। ब्रह्मचारी वह है जिसने त्याग को चुना है न कि रणनीतिक अवसर को। कार्यकर्ता संगठन का विस्तार करता है जबकि आचार्य आत्मबोध का विस्तार करता है। यदि कोई व्यक्ति पहले कार्यकर्ता है और बाद में संत बना है तो उसे अपने भीतर यह स्पष्ट करना होगा कि वह किस भूमिका में बोल रहा है। भगवा वस्त्र पहन लेने से वैराग्य सिद्ध नहीं होता जैसे खादी पहन लेने से गांधीत्व सिद्ध नहीं होता।
धर्म अर्थ काम और मोक्ष की सिद्धि की बात सुंदर है पर उसका अर्थ यह नहीं कि हर संकट में अवतार की प्रतीक्षा की जाए। सनातन की शक्ति उसकी आत्मशोधन क्षमता में है। शंकराचार्य ने मठ स्थापित किए थे ताकि ज्ञान और शास्त्र परंपरा जीवित रहे न कि वे राजनीतिक फ्रेंचाइजी बनें। यदि आज कोई भी पक्ष अपने समर्थक को संत और अपने विरोधी को कालनेमि घोषित करने लगे तो यह आस्था का नहीं बल्कि रणनीति का खेल है।
राष्ट्र का कल्याण तब होगा जब संत संत रहें और कार्यकर्ता कार्यकर्ता। संत का दायित्व है निर्भीक होकर सत्य कहना चाहे वह सत्ता को असुविधाजनक लगे या विपक्ष को। और कार्यकर्ता का दायित्व है संगठन के लक्ष्य के लिए काम करना। दोनों की गरिमा अलग है दोनों की मर्यादा अलग। सनातन का ज्ञान यही सिखाता है कि पद नहीं पात्रता बड़ी है और वेश नहीं वैराग्य बड़ा है। जब यह भेद समझ में आ जाएगा तब न किसी को कुचलने की आवश्यकता होगी और न किसी को काल्पनिक अवतारों की।








