
उत्तराखंड एसटीएफ और देहरादून पुलिस की संयुक्त कार्रवाई ने न सिर्फ कुख्यात सुनील राठी गैंग के दो सक्रिय सदस्यों भानू चौधरी और पारस को सलाखों के पीछे पहुंचाया है, बल्कि उनके आसपास घूमने-फिरने वाले लोगों की भी नींद उड़ा दी है। राजपुर क्षेत्र में पकड़े गए दोनों आरोपियों के पास से दो अवैध पिस्टल और सात जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं। पुलिस का मानना है कि ये किसी बड़ी वारदात की तैयारी में थे।
जांच में पारस का नाम सबसे अहम कड़ी के रूप में उभरा है। वह पहले भी संगठित अपराध से जुड़ा रहा है और कई गंभीर धाराओं में मुकदमे झेल चुका है। सूत्रों के अनुसार पारस जेल में बंद सुनील राठी के सीधे संपर्क में था और देहरादून-हरिद्वार की विवादित जमीनों में दखल देकर दबाव और उगाही का काम कर रहा था। भानू चौधरी उसके साथ सक्रिय भूमिका में था और दोनों कई बार जेल में मुलाकात करने भी गए थे।
सबसे अहम बात यह है कि पुलिस अब उन लोगों की सूची तैयार कर रही है जो इन दोनों के साथ उठते-बैठते, बैठकों में शामिल होते या उनके जरिए विवादित सौदों में जुड़े रहे। मोबाइल फोन और डिजिटल डाटा की जांच में कई नाम सामने आने की चर्चा है। एसटीएफ ने साफ संकेत दिए हैं कि केवल शूटर ही नहीं, बल्कि संरक्षण देने वाले, आर्थिक लेन-देन करने वाले और दबाव की रणनीति में शामिल लोग भी जांच के दायरे में आएंगे।
सूत्रों के मुताबिक पारस के संभावित ठिकानों और उसके संपर्कों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। जिन लोगों ने अब तक गैंग के नाम का इस्तेमाल कर अपने काम साधे, उनके लिए आने वाले दिन भारी पड़ सकते हैं। पुलिस पूरे नेटवर्क को तोड़ने की तैयारी में है और इस कार्रवाई को संगठित अपराध के खिलाफ बड़े अभियान की शुरुआत माना जा रहा है।







