“उत्तराखण्ड के इन सुरंगों में छुपा है मोदी-धामी का बड़ा मास्टरप्लान!”

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पर्वतीय राज्य उत्तराखण्ड में जिस सपने को वर्षों से देखा जा रहा था, वह अब साकार होने की ओर है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, जो लंबे समय से उत्तराखण्डवासियों की आकांक्षाओं का प्रतीक बनी हुई थी, अब अपनी ऐतिहासिक उपलब्धियों के साथ नई ऊंचाइयों को छू रही है। जनासू (पौड़ी गढ़वाल) में सुरंग संख्या T-8 और T-8M का ब्रेकथ्रू कार्यक्रम, जिसमें स्वयं केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की उपस्थिति रही, इस परियोजना की प्रगति का जीवंत प्रमाण है।

14.57 किलोमीटर लंबी इन डबल ट्यूब सुरंगों का निर्माण अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन (TBM) की सहायता से पूर्ण हुआ है, जो न केवल तकनीकी दृष्टि से अद्वितीय है, बल्कि यह बताता है कि अब विकास की गाड़ी वास्तव में गति पकड़ चुकी है। यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नए और सशक्त भारत’ की परिकल्पना को उत्तराखण्ड के संदर्भ में साकार कर रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सतत निगरानी और केंद्र सरकार के सहयोग से इस महत्वाकांक्षी योजना ने वह रफ्तार पकड़ी है, जिसकी प्रतीक्षा राज्य को लंबे समय से थी। यह रेलमार्ग उत्तराखण्ड को देश की मुख्यधारा से जोड़ने वाला महत्त्वपूर्ण जरिया बनने जा रहा है। इसके माध्यम से जहां स्थानीय पर्यटन को नई दिशा मिलेगी, वहीं युवाओं के लिए रोजगार और व्यवसाय की नई संभावनाएं भी जन्म लेंगी।

हर सुरंग, हर पुल और हर स्टेशन केवल संरचनात्मक निर्माण नहीं है, बल्कि वे उत्तराखण्ड के भविष्य के विकास द्वार हैं। यह एक तकनीकी उपलब्धि से कहीं अधिक, एक भावनात्मक और सामाजिक बदलाव की कहानी है। पहाड़ की कठिनाइयों को पार कर जिस तरह से यह परियोजना आगे बढ़ रही है, वह स्वयं उत्तराखण्ड के आत्मबल और संकल्प की प्रतीक बन चुकी है।

मोदी और धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड केवल कागज़ी योजनाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि धरातल पर परिवर्तन महसूस किया जा सकता है।यह परियोजना नए केवल ट्रेनों के चलने की सूचना है बल्कि एक संकल्प है कि उत्तराखंड अब रुकने वाला नहीं है

Khushi
Author: Khushi

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