“स्कूलों की मनमानी पर सविन बंसल की सर्जिकल स्ट्राइक, अब नहीं मिलेगी माफी”

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स्कूलों में अनियमितताओं को लेकर जिलाधिकारी सविन बंसल ने जिस सख्ती के साथ मोर्चा संभाला है, उसने अभिभावकों के बीच एक नई उम्मीद जगा दी है। लंबे समय से फीस वसूली, किताबें व ड्रेस के नाम पर चल रही लूट पर आखिरकार लगाम लगती नजर आ रही है।

डीएम सविन बंसल ने स्पष्ट कर दिया है कि अब कोई भी स्कूल प्रबंधन नियमों की अनदेखी करके नहीं बच पाएगा। माउंट लिट्रा और स्कॉलर्स होम स्कूल की जांच में जब मानकों से अधिक फीस वसूली की बात सामने आई, तो उन्होंने न सिर्फ तुरंत रिपोर्ट तलब की, बल्कि निर्देश भी दिए कि अतिरिक्त वसूली गई रकम अगली किस्त में समायोजित की जाए। यह फैसला हजारों अभिभावकों के लिए राहत भरा है।

सोशियल बलूनी और चैतन्य टेक्नो स्कूल के संचालकों के समीक्षा बैठक से गायब रहने को उन्होंने हल्के में नहीं लिया, बल्कि नोटिस जारी कर यह साफ संदेश दिया कि जिले में जवाबदेही से भागने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा। वहीं समर वैली स्कूल के संचालक को पुराने निर्देशों की अनदेखी करने पर तलब कर लिया गया है — यह सख्त प्रशासक की पहचान है।

सविन बंसल की कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे केवल कागज़ों पर कार्रवाई नहीं करते, बल्कि ज़मीनी सच्चाई को समझते हुए फैसले लेते हैं। किताबें और ड्रेस किसी भी दुकान से खरीदने की स्वतंत्रता का समर्थन करते हुए उन्होंने स्कूलों को निर्देश दिया है कि इस संबंध में अभिभावकों को स्पष्ट एडवाइजरी जारी करें। यह कदम उन हजारों परिवारों को राहत देगा, जिन पर ‘अनिवार्य खरीद’ का अनचाहा दबाव डाला जाता रहा है।

सविन बंसल अब केवल एक प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि छात्रों और अभिभावकों के लिए एक नायक की भूमिका में सामने आ रहे हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि जब प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में भी पारदर्शिता और जवाबदेही संभव है।

इस समय सविन बंसल की छवि एक ऐसे हीरो की बन रही है, जो न सिर्फ व्यवस्था से लड़ रहा है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों को न्याय दिलाने के लिए मैदान में डटा है। उनकी ये कार्यशैली न केवल अनुकरणीय है, बल्कि अन्य जिलों के अधिकारियों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है।

Khushi
Author: Khushi

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