
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है। धनौल्टी, टिहरी में तहसील नाजिर वीरेंद्र सिंह कैंतुरा को 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए विजिलेंस टीम द्वारा रंगे हाथ पकड़ा जाना कोई सामान्य घटना नहीं, बल्कि एक बड़ी कार्रवाई है—जो दर्शाती है कि शासन-प्रशासन अब पूरी तरह सक्रिय और सजग है।
यह कार्रवाई महज एक रिश्वतखोर कर्मी की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि धामी सरकार की ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति का जीवंत उदाहरण है। बीते तीन वर्षों में विजिलेंस द्वारा 150 से अधिक भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों को सलाखों के पीछे भेजा जाना इस बात का ठोस प्रमाण है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भ्रष्टाचार के खिलाफ किसी भी तरह की नरमी बरतने के मूड में नहीं हैं।
धामी सरकार का यह रुख न केवल शासन व्यवस्था में पारदर्शिता ला रहा है, बल्कि जनता में यह भरोसा भी जगा रहा है कि अब सरकार उनके साथ खड़ी है। यह वो बदलाव है जिसकी अपेक्षा जनता वर्षों से करती रही थी—जहां भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्रवाई केवल फाइलों तक सीमित न रहकर ज़मीन पर भी दिखाई दे रही हो।
पुष्कर सिंह धामी ने यह साबित किया है कि यदि नेतृत्व ईमानदार और संकल्पित हो, तो व्यवस्था में व्याप्त गंदगी को हटाया जा सकता है। आज उत्तराखंड एक ऐसे दौर में है जहां सत्ता का उपयोग व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि जनहित में किया जा रहा है—और यही वजह है कि धामी सरकार जनता के बीच एक मज़बूत और विश्वसनीय छवि के रूप में स्थापित होती जा रही है।








