
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में आयोजित “तिरंगा शौर्य सम्मान यात्रा” न केवल एक श्रद्धांजलि यात्रा थी, बल्कि यह राष्ट्रवाद, सैन्य सम्मान और जनसहभागिता का एक सशक्त उदाहरण भी बन गई। चीड़बाग से गांधी पार्क तक की यह पदयात्रा उस ऐतिहासिक सैन्य अभियान “ऑपरेशन सिंदूर” की विजय को समर्पित रही, जिसने हाल ही में भारत की सैन्य ताकत और रणनीतिक क्षमताओं को वैश्विक मंच पर पुनः सिद्ध किया है।
इस यात्रा में मुख्यमंत्री स्वयं सबसे आगे नजर आए, जो यह दर्शाता है कि उत्तराखंड सरकार न केवल सैन्य बलों के सम्मान में आगे है, बल्कि जनमानस को भी इस गर्व से जोड़ने में विश्वास रखती है। यात्रा में पूर्व सैनिकों, युवाओं और मातृशक्ति की भारी भागीदारी यह सिद्ध करती है कि देशभक्ति केवल एक भाव नहीं, बल्कि एक सामूहिक चेतना बन चुकी है।
मुख्यमंत्री धामी का वक्तव्य इस बात की पुष्टि करता है कि अब भारत, विशेषकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, आतंकवाद के प्रति “शांतिपूर्ण सहिष्णुता” की नीति से आगे बढ़ चुका है और अब वह प्रत्येक आतंकी कृत्य का जवाब “उसी की भाषा” में देने को तैयार है। ऑपरेशन सिंदूर इसी बदलाव की मिसाल है। मुख्यमंत्री द्वारा भारत की स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं का उल्लेख यह दर्शाता है कि अब देश आत्मनिर्भरता की दिशा में सैन्य क्षेत्र में भी मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
उत्तराखंड का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने जिस तरह इसे “वीर भूमि” बताया और युवाओं को सेना व सुरक्षा बलों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया, वह प्रदेश की पहचान को और भी गौरवपूर्ण बना देता है। यह एक रणनीतिक और सामाजिक पहल है, जो आने वाली पीढ़ियों को न केवल देशसेवा की प्रेरणा देगी, बल्कि उत्तराखंड को “रक्षा क्षेत्र की रीढ़” बनाने की दिशा में भी मदद करेगी।
मुख्यमंत्री की यह घोषणा कि ‘तिरंगा शौर्य सम्मान यात्रा’ हर वर्ष आयोजित की जाएगी, इस पहल को एक परंपरा का रूप देने का संकेत है। यह केवल एक आयोजन नहीं रहेगा, बल्कि वीरता, बलिदान और राष्ट्रीय गर्व का एक प्रतीक बन जाएगा। यह ब्लॉग इस बात को रेखांकित करता है कि यह यात्रा न केवल एक आयोजन थी, बल्कि यह उत्तराखंड की धरती से राष्ट्रवाद की एक नई लहर को जन्म देने वाला क्षण भी था।








