
रामनगर शव ई-रिक्शा मामला: स्वास्थ्य विभाग की सख्त कार्रवाई
रामनगर में ई-रिक्शा से शव ले जाने के मामले ने स्वास्थ्य विभाग को सख्त कार्रवाई के लिए प्रेरित किया है। स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने इस घटना को अमानवीय करार देते हुए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया है।
क्या है मामला?
रामनगर में एक शव को ई-रिक्शा से ले जाने की घटना सामने आई थी, जिसने स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और असंवेदनशीलता को उजागर किया। इस घटना ने लोगों में आक्रोश और दुख पैदा किया।
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई
स्वास्थ्य सचिव ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया है। समिति को घटना की जांच करने और दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान करने का निर्देश दिया गया है।
जांच समिति के सदस्य
- चिकित्सा स्वास्थ्य महानिदेशक: समिति के अध्यक्ष
- निदेशक प्रशासन: सदस्य
- निदेशक स्वास्थ्य, कुमाऊं मंडल: सदस्य
आगे की कार्रवाई
स्वास्थ्य सचिव ने दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात कही है। साथ ही, उन्होंने सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में अस्पतालों में शव वाहन की उपलब्धता सुनिश्चित करें।
निष्कर्ष
रामनगर शव ई-रिक्शा मामला स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और असंवेदनशीलता को उजागर करता है। स्वास्थ्य विभाग की सख्त कार्रवाई और जांच समिति का गठन इस बात का संकेत है कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है। अब देखना यह है कि जांच समिति की रिपोर्ट के बाद क्या कार्रवाई की जाती है।
उत्तराखंड के रामनगर उप-जिला चिकित्सालय में एक संवेदनशील घटना सामने आई है, जहां एक युवक के पार्थिव शरीर को अस्पताल से मोर्चरी तक ई-रिक्शा में ले जाया गया। यह मामला सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने गंभीरता से संज्ञान लिया है।
स्वास्थ्य सचिव डा. आर राजेश कुमार ने इस घटना को अत्यंत निंदनीय करार देते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मामले की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता चिकित्सा स्वास्थ्य महानिदेशक करेंगे, जबकि अन्य दो सदस्य निदेशक प्रशासन और निदेशक स्वास्थ्य, कुमाऊं मंडल होंगे। समिति को 30 मई तक जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य सचिव ने नैनीताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, उप जिला चिकित्सालय, रामनगर से भी 26 मई तक विस्तृत आख्या प्रस्तुत करने को कहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जांच में यह तथ्य सामने लाया जाए कि उप जिला चिकित्सालय में शव वाहन या एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध क्यों नहीं थी।
स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि इस घटना में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, उन्होंने सीएमओ को निर्देशित किया है कि भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं। स्वास्थ्य सचिव ने कहा यह हमारी नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है कि हर व्यक्ति को, चाहे वह जीवित हो या मृत, गरिमा के साथ सेवा और व्यवहार मिले। इस मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।” इसके अतिरिक्त, नैनीताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी से 26 मई तक घटना की विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी गई है। विशेष रूप से यह जांच की जाएगी कि शव वाहन उपलब्ध क्यों नहीं था और इस चूक के लिए कौन जिम्मेदार है।








