
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र में सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ने इस संधि को स्थगित करके जल को हथियार बनाया है। लेकिन भारत ने इसका करारा जवाब दिया है।
भारत का पक्ष:
– विदेश राज्य मंत्री किर्तिवर्धन सिंह ने कहा कि पाकिस्तान सिंधु जल संधि का जिक्र करके अंतरराष्ट्रीय मंचों का दुरुपयोग कर रहा है।
– उन्होंने स्पष्ट किया कि संधि की प्रस्तावना में कहा गया है कि इसे सद्भावना और मैत्री की भावना से संपन्न किया गया था, लेकिन पाकिस्तान ने सीमा पार से आतंक और दहशगर्दी करके इस संधि का उल्लंघन किया है।
– किर्तिवर्धन सिंह ने कहा कि समय बदलने के साथ ही तकनीक, भूराजनीतिक और जलवायु में परिवर्तन हुआ है, इसलिए इस संधि का पुनर्मूल्यांकन करने की जरूरत है।
सिंधु जल संधि का इतिहास:
– भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर हुए थे, जिसमें विश्व बैंक भी हस्ताक्षरकर्ता था।
– यह संधि दोनों देशों के बीच सिंधु नदी प्रणाली के जल के बंटवारे को नियंत्रित करती है।
– जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमले के बाद, भारत ने संधि को स्थगित करने समेत पाकिस्तान के खिलाफ कई सख्त कदमों की घोषणा की थी।
पाकिस्तान की स्थिति:
– पाकिस्तान के मंत्री बौखलाए हुए हैं और भारत को गीदड़भभकी दे रहे हैं।
– पाकिस्तान की स्थिति रस्सी जल गई लेकिन बल नहीं गया वाली कहावत की तरह हो गई है।
यहाँ कुछ और जानकारी है:
सिंधु जल संधि पर भारत का रुख:
– भारत ने स्पष्ट किया है कि वह सिंधु जल संधि का सम्मान करता है, लेकिन पाकिस्तान को भी अपने दायित्वों का पालन करना होगा।
– भारत ने कहा है कि पाकिस्तान को पहले अपने क्षेत्र में आतंकवाद को रोकने के लिए कदम उठाने होंगे, तभी संधि के मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
पाकिस्तान की चुनौतियाँ:
– पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति खराब है, और वह अपनी जल समस्या का समाधान नहीं कर पा रहा है।
– पाकिस्तान की राजनीतिक अस्थिरता भी एक बड़ा मुद्दा है, जो उसकी नीतियों को प्रभावित करती है।
भविष्य की संभावनाएँ:
– सिंधु जल संधि पर भविष्य में क्या होगा, यह दोनों देशों के बीच के संबंधों पर निर्भर करेगा।
– यदि दोनों देश आपसी समझौते से समस्याओं का समाधान निकालते हैं, तो संधि को बचाया जा सकता है।








