
सहारनपुर, एक समय में तहज़ीब और शांति की मिसाल माने जाने वाला यह जिला, अब मानो अपराध की प्रयोगशाला बन चुका है। ऐसा लगता है जैसे क्राइम ने यहां स्थायी निवास ले लिया हो और पुलिस महज़ किरायेदार बनकर रह गई हो। एक तरफ एसएसपी रोहित सजवाण को क्राइम कंट्रोल की जिम्मेदारी दी गई है, तो दूसरी तरफ अपराधियों ने पूरा जनपद ‘खेल का मैदान’ समझ लिया है। सवाल ये है कि मुकाबला हो किससे रहा है — अपराध से या व्यवस्था से?
हर दूसरे दिन गोली चलना अब कोई सनसनीखेज खबर नहीं रही। देवबंद जैसे संवेदनशील इलाके में खुलेआम हुए गोलीकांड ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अपराधी अब डरते नहीं, बल्कि दहशत का इवेंट मैनेजमेंट करते हैं। ऐसे हालात में आम नागरिक खुद से पूछता है: “पुलिस वाकई मौजूद है या सिर्फ ट्विटर और प्रेस नोट्स तक सीमित है?”
युवाओं में जोश होना अच्छी बात है, लेकिन जब ये जोश ‘गैंग बनने’ और ‘वायरल वीडियो’ बनाने में खर्च होने लगे तो समझ लीजिए कि सामाजिक व्यवस्था की रीढ़ टूटने लगी है। जनपद के युवा अब सेना, सरकारी नौकरी या शिक्षा की बात कम और ‘कौन सा गैंग कितना वायरल है’ इस पर ज्यादा चर्चा करते नजर आते हैं। अपराध अब करियर ऑप्शन बनता जा रहा है — बिना परीक्षा, बिना इंटरव्यू, और सबसे खास — बिना डर।
पुलिस की ओर से दबिशें जारी हैं, ये बात भी रोज़ की रिपोर्टिंग का हिस्सा बन चुकी है। लेकिन ये दबिशें असली अपराधियों तक कब पहुंचेंगी, इसका जवाब खुद पुलिस के पास भी नहीं है। अपराधी जैसे GPS ऑन करके घूम रहे हैं, और पुलिस बिना नक्शे के उन्हें खोज रही है। कहीं न कहीं व्यवस्था में भी अपराधियों को ‘आश्वासन’ मिलता दिखाई देता है कि “कुछ नहीं होगा, आराम से करो।”
एसएसपी रोहित सजवाण के सामने सबसे बड़ा सवाल ये नहीं है कि अपराध कैसे रोके जाएं, बल्कि ये है कि भरोसा कैसे लौटाया जाए — उस जनता का भरोसा, जो अब थाने जाने से ज्यादा सोशल मीडिया पर न्याय की भीख मांगने लगी है।
कभी कहते थे कि कानून अंधा होता है, अब लगता है वह बहरेपन की भी शिकार हो गया है। गोलियों की आवाज़ें सुनाई नहीं देतीं, चीखें रिपोर्ट नहीं होतीं और अपराधियों की हँसी सबसे ऊंची सुनाई देती है।
सच तो ये है कि अगर अब भी प्रशासन ने ज़मीन पर उतरकर काम नहीं किया, तो सहरानपुर जल्द ही ‘अपराध का आदर्श जिला’ बन जाएगा — और फिर यहां के स्कूलों में बच्चों को गांधी नहीं, गैंगस्टर की जीवनी पढ़ाई जाएगी।
बस दुआ कीजिए कि सिस्टम अब भी जाग जाए, क्योंकि अगर पुलिस वर्दी में सिर्फ फोटोशूट ही करती रही, तो एक दिन वर्दी वालों को जनता नहीं, अपराधी सलामी देंगे।








