धामी सरकार की नीतियां विपक्ष की बेचैनी का सबब बनीं, कांग्रेस के पास शोर है पर सोच नहीं

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धामी सरकार को लेकर विपक्ष की बेचैनी अब छुपी नहीं रही। जब विकास ज़मीन पर दिखने लगे, जब योजनाओं की शुरुआत उद्घाटन तक सीमित न रहकर परिणाम तक पहुँचने लगे, जब जनता सीधे लाभ महसूस करने लगे—तब विरोधी दलों के पास सवाल उठाने के लिए मुद्दे नहीं, शोर मचाने के लिए माइक्रोफोन ही बचते हैं। यही हाल आज उत्तराखंड में कांग्रेस का है।

प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान ने सटीक कहा है कि धामी सरकार की “विकल्प रहित संकल्प” नीति अब नतीजों में तब्दील हो चुकी है। योजनाएं सिर्फ घोषणाओं की खानापूर्ति नहीं, बल्कि धरातल पर क्रियान्वयन की मिसाल बन रही हैं। पुरोला से लेकर पिथौरागढ़ तक, सड़कों से लेकर स्कूलों तक, स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर पर्यटन क्षेत्र तक—धामी सरकार ने हर कोने को अपने विजन से जोड़ा है।

अब विपक्ष के पास न तो दिशा है, न दशा। कांग्रेस आज उसी प्रदेश में “विकास की कमी” का ढोल पीट रही है, जहाँ वो खुद दशकों तक शासन में रहकर फाइलों के कवर तक नहीं पलट सकी। तंज तो बनता है—जिन्होंने गड्ढों में भविष्य बो दिया, वो आज रोडमैप की दुहाई दे रहे हैं।

धामी सरकार ने उत्तराखंड को वह पहचान दी है जो वर्षों तक सिर्फ भाषणों में उलझी रही। UCC (समान नागरिक संहिता) लागू कर पहला प्रदेश बनने का गौरव, भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति, भू-कानून में सख्ती और आपदा प्रबंधन में तेज़ रेस्पॉन्स सिस्टम ने यह दिखा दिया कि सरकार चलाना केवल कुर्सी पर बैठना नहीं, ज़िम्मेदारी निभाना होता है।

सवाल ये नहीं कि कांग्रेस आज विरोध क्यों कर रही है। सवाल ये है कि जिस कांग्रेस ने उत्तराखंड की राजनीति को परिवारवाद, चाटुकारिता और नकारेपन से भरा, वह आज खुद को विकल्प के तौर पर कैसे पेश कर सकती है? जिसका नेतृत्व ही अपनी पार्टी में असुरक्षित हो, वो प्रदेश को क्या सुरक्षा देगा?

सिल्क्यारा सुरंग रेस्क्यू से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में दिख रहे प्रत्यक्ष परिवर्तन, धामी सरकार की नीति और नीयत दोनों को उजागर करते हैं। और जब नीयत साफ हो तो नीति खुद ही बोलने लगती है।

साफ है—आज धामी सरकार की आलोचना नहीं हो रही, उसकी सफलता से विपक्ष घबरा रहा है। और जब विरोधी घबराते हैं, तो असली विकास की शुरुआत होती है।

Khushi
Author: Khushi

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