“डिजिटल एजुकेशन: सरकार की पहल से बदल रहा है शिक्षा का भविष्य”

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सरकार ने स्मार्ट एजुकेशन और डिजिटल एजुकेशन को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। कोरोना महामारी के बाद, शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल तकनीकों का उपयोग बढ़ गया है। सरकार ने विभिन्न पहल की हैं, जिनमें शामिल हैं:
डिजिटल शिक्षा: सरकार ने डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म और संसाधनों का विकास किया है। इससे छात्रों को घर बैठे शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला है।
ऑनलाइन पाठ्यक्रम: सरकार ने विभिन्न ऑनलाइन पाठ्यक्रम शुरू किए हैं, जो छात्रों को विभिन्न विषयों में शिक्षा प्रदान करते हैं।
शिक्षा ऐप्स: सरकार ने शिक्षा ऐप्स को बढ़ावा देने के लिए काम किया है, जो छात्रों को मोबाइल फोन के माध्यम से शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्रदान करते हैं।
डिजिटल साक्षरता: सरकार ने डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए कार्यक्रम शुरू किए हैं, जो छात्रों को डिजिटल तकनीकों का उपयोग करने के लिए प्रशिक्षित करते हैं।
इन पहलों का उद्देश्य छात्रों को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से शिक्षा प्रदान करना और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करना है। सरकार का प्रयास है कि सभी छात्रों को समान अवसर मिले और वे अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सके।

सुकांत मजूमदार ने बताया कि दुनिया में कोरोना महामारी आने के बाद हर सेक्टर में बदलाव हुआ. एजुकेशन सेक्टर भी इससे पीछे नहीं रहा है. हम कुछ साल पहले की बात करें तो पहले बच्चों के लिए ऑप्शन ही नहीं थे. उस वक्त बच्चे को अपने तय स्कूल या तय टीचर से ही पढ़ना पड़ता था, भले ही उसे चीजें समझ आएं या नहीं. हालांकि, अब काफी कुछ बदल चुका है. केंद्र की मोदी सरकार के कार्यकाल में तमाम डिजिटल फॉर्मेट मौजूद हैं, जहां बच्चा न सिर्फ आधुनिक तकनीक की मदद से पढ़ाई कर सकता है, बल्कि परीक्षा भी दे सकता है.

क्या है सरकार का प्लान?
सुकांत मजूमदार के मुताबिक, पिछले केंद्रीय बजट में डिजिटल एजुकेशन सेक्टर को लेकर कई बड़े ऐलान किए गए. इसमें तय किया गया कि देशभर के सभी स्कूलों को ब्रॉडबैंड के माध्यम से जोड़ा जाएगा. इसके अलावा 50 हजार न्यू अटल टिंकर लैब बनाई जाएंगी. इसमें एआई से लेकर थ्रीडी प्रिंटिंग आदि की मदद से बच्चों को नई-नई तकनीक से रूबरू कराया जाएगा. इसकी मदद से ही देश को 2047 तक विकसित करने का लक्ष्य पूरा हो पाएगा.
NEP से कितना लक्ष्य हुआ हासिल?
केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि एनईपी यानी न्यू एजुकेशन पॉलिसी एक निरंतर प्रक्रिया है, जो 2035 तक यह पूरी तरह लागू हो पाएगी. दरअसल, यह बाल वाटिका से शुरू होती है और एजुकेशन के टॉप लेवल यानी यूनिवर्सिटी तक जाती है. देश में 34 साल बाद नई शिक्षा नीति आई है. इसका लगातार असेसमेंट किया जाता है कि बच्चे कितना सीख रहे हैं. इसके अलावा दीक्षा पोर्टल के माध्यम से एजुकेशन मिनिस्ट्री लगातार स्टडी करती रहती है. इस पोर्टल को इस्तेमाल करने वाले बच्चों का रिजल्ट 14 से 20 पर्सेंट तक बेहतर रहा है. वहीं, निपुण भारत की मदद से स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों पर भी फोकस किया जाता है।
कार्यक्रम में ये स्पीकर्स भी हुए शामिल
एबीपी न्यूज के एबीपी स्मार्ट एजुकेशन कॉनक्लेव में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद, Innov8 के डॉ. रितेश मलिक, एडम्स यूनिवर्सिटी के डॉ. समित राय, नेक्स्ट एजुकेशन के व्यास देव रल्हान, अड्डा247 के अनिल नागर समेत तमाम एजुकेशन एक्सपर्ट्स शामिल हुए. उन्होंने देश की शिक्षा नीति और एजुकेशन सिस्टम से जुड़े तमाम मसलों पर चर्चा की. साथ ही, बताया कि सरकार की शिक्षा नीति से बच्चों का भविष्य कैसे उज्ज्वल

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Author: Khushi

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