
जिस दफ्तर की कुर्सियों पर बैठकर जनता की समस्याएं सुनी जानी चाहिए थीं, वहीं कुछ सरकारी बाबू किस्मत के पत्ते फेंट रहे थे। कौन जीतेगा बाज़ी – जनता की उम्मीद या ताश की गड्डी? इस सवाल का जवाब उस वायरल वीडियो में मिल गया जिसमें राजस्व विभाग का एक कारिंदा अपने ही दफ्तर में जुए की बिसात बिछाए बैठा था। अब चूंकि कैमरा था, और कैमरे की आंखें न कभी झपकती हैं, न माफ करती हैं – लिहाज़ा डीएम सविन बंसल को अपनी प्रशासनिक तलवार म्यान से बाहर निकालनी पड़ी।
बिना किसी ‘ऑडिट रिपोर्ट’ या ‘स्पष्टीकरण तलब’ की नौटंकी के, डीएम ने सीधे कार्रवाई का रास्ता चुना – और रायगी के राजस्व उप निरीक्षक नागचन्द को तत्काल निलंबित कर दिया। आखिरकार, अगर दफ्तर का मैन गेट ही ‘कैसीनो गेट’ बन जाए तो फिर लोगों का विश्वास प्रशासन में कैसे टिके?
व्यंग्य का दर्द यही है कि ये कोई फिल्मी स्क्रिप्ट नहीं, बल्कि सरकारी दफ्तर का यथार्थ है। जहां ताश के पत्तों से ‘फूल-इक्के’ बनाने में कर्मी मशगूल थे, वहां जनता की फाइलें धूल फांक रही थीं। जब ये वीडियो सोशल मीडिया पर उछला, तो जनता ने नहीं, खुद ‘प्रशासन’ ने अपना सिर पकड़ लिया। जिस विभाग की छवि पहले ही ‘धीरे चलो विभाग’ जैसी बन चुकी है, उसमें इस तरह की हरकतें आग में घी का काम करती हैं।
बहरहाल, डीएम की चुस्ती काबिले-गौर है। उन्होंने सिर्फ दोषी को निलंबित नहीं किया, बल्कि आगे की जांच के लिए तहसीलदार को अधिकृत भी किया है। साथ ही बाकी जुआरियों की पहचान भी तय है – यानी इस बार ‘पत्ते’ फिर से खुलेंगे, लेकिन प्रशासनिक अनुशासन की टेबल पर। उम्मीद की जानी चाहिए कि बाकी बचे खिलाड़ी अब विभागीय रूलबुक भी उतनी ही गंभीरता से पढ़ेंगे, जितनी गंभीरता से अब तक पत्ते पढ़ते आए हैं।








