
प्रदेश में इन दिनों आसमान ने जैसे “नो ब्रेक” मोड ऑन कर रखा है—लगातार बारिश, उफनती नदियाँ, और जगह-जगह जलभराव। ऐसे में आमतौर पर अफसरों का जवाब होता है, “स्थिति पर नज़र है”, लेकिन इस बार जिलाधिकारी सविन बंसल ने सिर्फ नज़र नहीं, बल्कि पूरा मैदान थाम रखा है। सुबह से लेकर देर रात तक मीटिंग, QRT टीमों से सीधे ग्राउंड रिपोर्ट, और हर तहसील से पल-पल की अपडेट—लगता है डीएम साहब ने “ऑफिस चेयर” की बजाय “कमांड कंट्रोल” मोड चुन लिया है।
राजीव नगर रिस्पना किनारे के परिवारों के लिए गेस्ट हाउस में 15 कमरे तैयार, मवेशियों के लिए मैदान अधिग्रहित, और भोजन की व्यवस्था—यह सब बारिश के बीच पहले से हो चुका है। मतलब, पानी के आने से पहले ही नाव तैयार कर दी गई है।
दीपनगर में एसडीएम हरी गिरी का जायजा लेना और डीएम का लगातार निगरानी रखना यह बताता है कि यहाँ फाइलों में नहीं, बल्कि फील्ड में प्लान बन रहा है। और यह भी साफ है कि डीएम साहब ने अलर्ट को सिर्फ “मौसम विभाग का बयान” मानकर छोड़ने की गलती नहीं की—उन्होंने उसे “वर्क ऑर्डर” समझ लिया है।
अब देखना यह है कि जब बादल हटेंगे, तो जनता के बीच डीएम सविन बंसल का यह रेस्पॉन्स एक प्रशासनिक उदाहरण के रूप में गूँजेगा या फिर मानसून की तरह यादें भी अगले सीज़न तक के लिए ठंडी पड़ जाएँगी।








