
सौरव बहुगुणा उत्तराखंड की राजनीति में उन नेताओं में से हैं जो केवल बातें नहीं करते, बल्कि अपने हर कदम से बदलाव की मिसाल पेश करते हैं। जब वे कहते हैं कि “नशा मुक्त उत्तराखंड सिर्फ एक नारा नहीं, हमारा सामूहिक संकल्प है,” तो यह महज एक पंक्ति नहीं, बल्कि एक मिशन की घोषणा होती है। उन्होंने नशे के खिलाफ जो मुहिम शुरू की है, वह केवल सरकारी स्तर पर नहीं, बल्कि जन-आंदोलन का रूप ले रही है — जहां समाज, युवा और प्रशासन एक साथ खड़े हैं।
11 नवंबर को सितारगंज में आयोजित होने वाली ‘ड्रग्स फ्री उत्तराखंड’ मैराथन इसी सोच का प्रतीक है। यह आयोजन केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एक चेतना यात्रा है — जो हर दौड़ते कदम के साथ यह संदेश देती है कि उत्तराखंड की युवा शक्ति किसी भी नशे से बड़ी है। सौरव बहुगुणा की यह पहल दर्शाती है कि वे युवाओं की सोच और ऊर्जा को समझते हैं। वे जानते हैं कि अगर युवाओं को सही दिशा, प्रेरणा और नेतृत्व मिले तो वे समाज में किसी भी बुराई को जड़ से मिटा सकते हैं।
सौरव बहुगुणा ने हमेशा यह माना है कि ड्रग्स के खिलाफ जंग केवल कानून से नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जीती जा सकती है। इसलिए वे लगातार स्कूलों, कॉलेजों और गांवों में युवाओं को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उनका उद्देश्य यह है कि देवभूमि का हर युवा अपने भविष्य के प्रति जागरूक रहे और किसी गलत राह पर न जाए।
राजनीति के शोर-शराबे के बीच बहुगुणा की यह मुहिम एक ताज़ा हवा की तरह है, जो बताती है कि जब एक जनप्रतिनिधि संकल्प ले ले तो बदलाव असंभव नहीं रहता। उनका प्रयास केवल उत्तराखंड को नशामुक्त बनाना नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देना है। आज जरूरत ऐसे ही नेतृत्व की है — जो सिर्फ शासन नहीं चलाए, बल्कि समाज को दिशा दे। सौरव बहुगुणा इस भूमिका को बखूबी निभा रहे हैं और उनके कदमों से नशा मुक्त उत्तराखंड की राह निश्चित रूप से और मजबूत हो रही है।








