“भौकाल लौट आया — एसएसपी अजय सिंह ने अपराधियों की रीढ़ में बारूद भरकर देहरादून को फिर किया सुरक्षित”

SHARE:

एसएसपी अजय सिंह—नाम तो सुना होगा! वही आईपीएस जो अपराधियों की रीढ़ में बारूद भरने का हुनर जानते हैं। फाइलों में नहीं, फील्ड में फैसले लेने वाले अफसर हैं वो। अपराधी अगर सोचते हैं कि दून में फायरिंग कर कानून की धज्जियाँ उड़ा लेंगे, तो ये भूल भी वही दिन में कर लेते हैं जब अजय सिंह की टीम रात में गश्त पर निकलती है।

जिस तेजी से फायरिंग की घटना के बाद पूरी पुलिस मशीनरी एक्टिव हुई, वो बताती है कि देहरादून में अब “सिस्टम” नहीं, “सिंह सिस्टम” चलता है। लालतप्पड़ की रात की मुठभेड़ में दो बदमाशों के पैर जवाब दे गए, तीसरा जंगल में जान बचाता फिर रहा है — और ये सिर्फ मुठभेड़ नहीं थी, बल्कि अपराधियों के लिए सबक था कि यहां अब गोलियां नहीं, जवाब मिलते हैं।

अजय सिंह की स्टाइल अलग है — पहले अपराधी को ढूंढते हैं, फिर कानून का आइना दिखाते हैं, और अगर वो भी न समझे, तो गोली की आवाज़ में समझ आ ही जाती है कि ये देहरादून है, दिल्ली नहीं जहां अपराधी प्रेस कॉन्फ्रेंस करते फिरें।

कहावत है — जिस शहर में कप्तान की नजर बाज़ जैसी हो, वहां अपराधी कबूतर की तरह छिपते हैं।
और आज देहरादून में यही हो रहा है — अजय सिंह की मौजूदगी में कोई गुंडा चैन की नींद नहीं सो सकता। ये वही आईपीएस हैं जो कानून की किताब नहीं, अपराधियों की हड्डियों पर हकूमत लिखते हैं।

Khushi
Author: Khushi

Leave a Comment

सबसे ज्यादा पड़ गई