
देहरादून के अफसरों में अगर किसी की कार्यशैली में “समय से पहले काम पूरा करने की आदत” बची है, तो उसका नाम है—नमामि बंसल। रजत जयंती पार्क इसका जीवंत उदाहरण है। जहाँ बाकी विभागों की योजनाएँ फाइलों में दौड़ लगाती रह जाती हैं, वहीं नगर निगम ने इस पार्क को निर्धारित समय से पहले तैयार कर शहर को उपहार दे दिया।
नमामि बंसल खुद स्थल पर जाकर निरीक्षण करती हैं, यह वही ‘ऑफिस वाली’ अफसर नहीं हैं जो केवल रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करती हों। उनके लिए मैदान ही असली ऑफिस है। किसी ने सही कहा है—देहरादून में अगर कोई पार्क “फूल” रहा है, तो पीछे किसी न किसी दिन नमामि बंसल “घूम” चुकी होती हैं।
रजत जयंती के अवसर पर यह पार्क शहर को समर्पित किया जाएगा, लेकिन असली समर्पण तो उस टीम का है जिसने अपनी बॉस के टेंपो में तालमेल बैठाया। वरना सरकारी कामों में “समय से पहले” शब्द तो वैसे ही दुर्लभ होता है जैसे बारिश में सूखा आदेश।
कुल मिलाकर, रजत जयंती पार्क सिर्फ हरियाली का प्रतीक नहीं, बल्कि यह संदेश भी देता है कि अगर नगरायुक्त चाह ले तो फाइलें भी ‘समय पर’ चल सकती हैं और शहर भी मुस्कुरा सकता है।








