आईएसबीटी में अव्यवस्था पर चला डीएम का डंडा, जनता को राहत, अधिकारियों की जवाबदेही तय

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आईएसबीटी क्षेत्र वर्षों से अव्यवस्था, अतिक्रमण और प्रशासनिक ढिलाई का ऐसा नमूना बन चुका था, जिसे देखकर लगता था कि यह शहर का प्रवेश द्वार नहीं बल्कि अव्यवस्था का स्थायी ठिकाना है। बसों की निकासी के लिए बने गेट बंद, पुलिस चौकी रास्ते में, फ्लाईओवर के नीचे अवैध कट, सड़क किनारे बेतरतीब खड़े वाहन सब कुछ मानो इस इंतज़ार में था कि कोई आए और पूछे, “आख़िर जिम्मेदार कौन है?”
जिलाधिकारी सविन बंसल का आईएसबीटी निरीक्षण इसी सवाल का सीधा जवाब बनकर सामने आया। यह केवल औपचारिक दौरा नहीं था, बल्कि मौके पर निर्णय, मौके पर निर्देश और मौके पर स्वीकृति का उदाहरण था। दिल्ली जाने वाले गेट के बंद मिलने पर नाराज़गी सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं रही, बल्कि जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई के निर्देश तक पहुंची। वर्षों से जो गेट ‘कागज़ों में चालू’ था, वह ज़मीन पर भी चालू हो यह संदेश साफ था।
फ्लाईओवर के नीचे अवैध कट बंद करने, सुरक्षित क्रॉसओवर बनाने और रंग-कोडेड व्यवस्थित पार्किंग की योजना केवल यातायात सुधार नहीं, बल्कि शहरी सोच का संकेत है। सड़क किनारे खाली पड़ी ज़मीन को टाइल्स पार्किंग में बदलने के लिए एनएच को मौके पर ही धन स्वीकृत होना बताता है कि फाइलें अब दौड़ेंगी नहीं, काम दौड़ेगा।
आईएसबीटी गेट पर बने अनावश्यक निर्माण को ध्वस्त करने और चौकी को शिफ्ट करने के निर्देश उस प्रशासनिक साहस का उदाहरण हैं, जहां “यह पहले से है” या “यहीं चलता आ रहा है” जैसे बहाने अब नहीं चलेंगे। आरटीओ को अवैध पार्किंग पर सख्ती के निर्देश यह भी साफ करते हैं कि यातायात सुधार केवल बयान नहीं, अभियान होगा।
सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह रहा कि आईएसबीटी क्षेत्र में अब अव्यवस्था, अतिक्रमण और लापरवाही के लिए कोई जगह नहीं है। जनता के डीएम के रूप में सविन बंसल का यह रुख उन अधिकारियों के लिए भी संकेत है जो अक्सर व्यवस्था को ‘जैसे चल रहा है’ के भरोसे छोड़ देते हैं। तंज बस इतना है कि अगर यह निरीक्षण पहले हो जाता, तो शायद शहर के प्रवेश द्वार पर अव्यवस्था को आदत न बनानी पड़ती। अब उम्मीद है कि आईएसबीटी पहचान बनेगा अव्यवस्था की नहीं, बल्कि व्यवस्था की।

Khushi
Author: Khushi

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