“अंकिता भंडारी प्रकरण में मुख्यमंत्री धामी ने दिखाई संवेदनशीलता और दृढ़ नेतृत्व की मिसाल, कानून, न्याय और भरोसे की राह तय”

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देहरादुन,अंकिता भंडारी प्रकरण ने उत्तराखंड की सामूहिक चेतना को झकझोर दिया है। यह केवल एक जघन्य अपराध का मामला नहीं, बल्कि समाज, व्यवस्था और संवेदनशील शासन की कसौटी भी है। ऐसे समय में भावनाओं का उबाल स्वाभाविक है, आक्रोश भी है, सवाल भी हैं। लेकिन इसी उथल-पुथल के बीच सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बयान एक ठहराव, एक दिशा और एक भरोसे का संकेत देता है।
सीएम धामी ने स्वयं को “राज्य का मुख्य सेवक” कहकर सत्ता की भाषा नहीं, जिम्मेदारी की भाषा चुनी है। यह कोई शब्दों का खेल नहीं था, बल्कि यह स्वीकारोक्ति थी कि सरकार न्याय की मालिक नहीं, बल्कि न्याय की राह आसान करने वाली माध्यम है। बहन अंकिता के माता-पिता से सीधे संवाद करने की बात कहकर उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि इस प्रकरण में फैसले बंद कमरों में नहीं होंगे, बल्कि पीड़ित परिवार की इच्छा, विश्वास और कानून तीनों के संतुलन से आगे बढ़ेंगे।
आज उत्तराखंड में जो उबाल है, वह न्याय की मांग का है, न कि अराजकता की। मुख्यमंत्री का रुख इसी अंतर को रेखांकित करता है। उन्होंने न तो जल्दबाजी में भावनात्मक वादे किए, न ही किसी दबाव में आकर कानून से बाहर की बात कही। “जो भी चाहेंगे, उसे कानून सम्मत आगे बढ़ाया जाएगा” यह वाक्य ही धामी की दृढ़ता का प्रमाण है। यह संदेश देता है कि न्याय न तो भीड़ तय करेगी और न ही सत्ता, बल्कि कानून के दायरे में रहकर सत्य तक पहुंचा जाएगा।
धामी का यह रुख जनता को यह भरोसा देता है कि सरकार इस मामले को हल्के में नहीं ले रही। गंभीरता इस बात से झलकती है कि मुख्यमंत्री खुद पीड़ित परिवार से बात करने की जिम्मेदारी ले रहे हैं। यह संवेदनशीलता बताती है कि राज्य का नेतृत्व दर्द को समझता है, उसे महसूस करता है और उसे राजनीतिक हथियार बनने से बचाना चाहता है।
इस समय उत्तराखंड को गुस्से से ज्यादा संयम और अविश्वास से ज्यादा भरोसे की जरूरत है। मुख्यमंत्री का बयान उसी भरोसे की नींव रखता है। यह कहता है कि न्याय का रास्ता लंबा हो सकता है, लेकिन वह अटल होगा; शांत होगा, लेकिन कमजोर नहीं; संवेदनशील होगा, लेकिन भटकेगा नहीं।
जनता के लिए संदेश साफ है—आक्रोश स्वाभाविक है, लेकिन दिशा जरूरी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिशा दी है कि यह लड़ाई कानून, संवेदना और धैर्य के साथ लड़ी जाएगी। यही रास्ता बहन अंकिता को सच्चा न्याय दिला सकता है और यही वह नेतृत्व है, जो कठिन समय में प्रदेश को स्थिरता और विश्वास देता है।

Khushi
Author: Khushi

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