
अंकिता भंडारी प्रकरण में CBI जांच की संस्तुति मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उस मजबूत और स्पष्ट नेतृत्व को रेखांकित करती है, जिसमें संवेदना भी है और निर्णय की दृढ़ता भी। यह फैसला किसी दबाव या भ्रम का परिणाम नहीं, बल्कि न्याय के प्रति सरकार की अडिग प्रतिबद्धता का स्वाभाविक विस्तार है।
घटना के सामने आते ही सरकार ने बिना समय गंवाए कार्रवाई की। महिला आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में SIT का गठन, आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और प्रभावी पैरवी ने यह साबित किया कि सत्ता के शीर्ष पर बैठे व्यक्ति की मंशा क्या है। ट्रायल के दौरान किसी भी आरोपी को जमानत न मिलना और अंततः आजीवन कारावास की सजा मिलना इस बात का ठोस प्रमाण है कि धामी सरकार ने इस प्रकरण को हल्के में नहीं लिया।
इसके बावजूद, जब स्वर्गीय अंकिता के माता–पिता ने अपनी भावनाओं और आशंकाओं के साथ CBI जांच का अनुरोध रखा, तो मुख्यमंत्री ने इसे चुनौती नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार किया। एक मजबूत मुख्यमंत्री वही होता है जो अपने फैसलों पर अडिग भी रहे और जरूरत पड़ने पर न्याय को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कदम भी उठाए। धामी ने यही किया।
सोशल मीडिया पर सामने आई ऑडियो क्लिप्स को लेकर अलग–अलग FIR दर्ज होना यह स्पष्ट करता है कि सरकार किसी भी पहलू को दबाने या नजरअंदाज करने की मानसिकता में नहीं है। संदेश साफ है—सच जहां तक जाएगा, सरकार वहां तक जाएगी।
मुख्यमंत्री धामी का यह कहना कि अंकिता केवल एक पीड़िता नहीं, बल्कि हमारी भी बहन और बेटी थी, कोई भावनात्मक औपचारिकता नहीं, बल्कि उनके नेतृत्व की सोच है। यह फैसला उत्तराखंड ही नहीं, पूरे देश के लिए यह संदेश देता है कि बेटियों के सम्मान और न्याय के प्रश्न पर सरकारें कमजोर नहीं, बल्कि और मजबूत होकर खड़ी होनी चाहिए।
अंकिता भंडारी प्रकरण में CBI जांच की संस्तुति दरअसल यह साबित करती है कि पुष्कर सिंह धामी केवल सत्ता नहीं चला रहे, बल्कि भरोसा कायम कर रहे हैं—और यही एक सशक्त, संवेदनशील और निर्णायक मुख्यमंत्री की असली पहचान है।








