जब जिम्मेदारी मिली तो बदली कैंटीन की तस्वीर, विजय जोशी ने पेश की कार्यसंस्कृति की मिसाल

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उत्तरांचल प्रेस क्लब जैसी संस्था में जिम्मेदारी केवल पद से नहीं, नीयत और कर्म से पहचानी जाती है। विजय जोशी भाई को जैसे ही बार कैंटीन के संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी गई, उसी क्षण से यह स्पष्ट हो गया कि यह दायित्व औपचारिक नहीं बल्कि सेवा भाव से निभाया जाएगा। अक्सर ऐसी व्यवस्थाएं लापरवाही की भेंट चढ़ जाती हैं, लेकिन यहां तस्वीर बिल्कुल उलट दिखाई देती है।
कैंटीन अब सिर्फ पेट भरने की जगह नहीं, बल्कि सदस्यों के स्वास्थ्य, सम्मान और सुविधा का भरोसेमंद ठिकाना बनती दिख रही है। स्वच्छता पर सख्ती, भोजन के स्वाद में निरंतरता और गुणवत्ता में कोई समझौता नहीं यह तीनों बातें किसी भी संस्थागत कैंटीन की रीढ़ होती हैं, और इन्हीं कसौटियों पर यह व्यवस्था खरी उतरती है। साफ-सुथरा माहौल, संतुलित और पौष्टिक भोजन यह बताता है कि यहां निगरानी केवल कागजों पर नहीं, रोजमर्रा की कार्यशैली में है।
विजय जोशी की यह पहल दरअसल एक संदेश भी है कि प्रेस क्लब केवल विमर्श और बहस का मंच नहीं, बल्कि अपने सदस्यों की बुनियादी जरूरतों के प्रति भी उतना ही संवेदनशील है। छोटी दिखने वाली जिम्मेदारी को बड़ी समझदारी से निभाना ही नेतृत्व की पहचान होती है। यह व्यवस्था यह भी दर्शाती है कि जब व्यक्ति अपने दायित्व को अपना मान ले, तो परिणाम स्वतः ही दिखाई देने लगते हैं।
कुल मिलाकर, यह प्रयास किसी प्रचार का मोहताज नहीं है। सदस्य स्वयं फर्क महसूस कर रहे हैं, और यही सबसे बड़ी उपलब्धि है। क्लब के प्रति यह जिम्मेदारी और समर्पण प्रशंसा योग्य है, और निश्चित तौर पर यह उदाहरण दूसरों के लिए भी प्रेरणा बनेगा। विजय जोशी को इस सराहनीय व्यवस्था के लिए साधुवाद।

Khushi
Author: Khushi

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