राजधानी को मिला दमदार डीएम पहले ही दिन एक्शन में दिखे डॉ. आशीष चौहान फरियाद से फैसले तक दिखी सख्त और संवेदनशील प्रशासन की झलक

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देहरादून की कमान संभालते ही डॉ. आशीष चौहान ने साफ कर दिया कि अब फाइलों वाला प्रशासन नहीं बल्कि मैदान में उतरकर काम करने वाला निजाम दिखेगा। पहले ही दिन जनता मिलन में पहुंचकर जिस तरह उन्होंने एक एक फरियाद सुनी उससे यह पैगाम गया कि राजधानी को अब एक सख्त मगर संवेदनशील प्रशासक मिला है।
मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami के भरोसेमंद अधिकारियों में माने जाने वाले डॉ. आशीष चौहान ने शुरुआत से ही यह संकेत दे दिए कि जनहित उनके काम का सबसे अहम हिस्सा रहेगा। ऑनलाइन शिकायत ट्रैकिंग सिस्टम बनाने की बात हो या वर्षों पुराने भूमि विवादों पर तुरंत कार्रवाई के निर्देश यह दिखाता है कि उनकी रणनीति सिर्फ आदेश देने तक सीमित नहीं बल्कि नतीजे जमीन पर दिखाने की है।
राजधानी देहरादून की जिम्मेदारी आसान नहीं है। चारधाम यात्रा का दबाव है बढ़ती आबादी है अतिक्रमण है भूमि विवाद हैं और आम आदमी की उम्मीदें भी बहुत बड़ी हैं। ऐसे वक्त में प्रशासन को एक ऐसे अफसर की जरूरत थी जो फैसले लेने में तेज हो और जनता से सीधा संवाद रखना जानता हो।
पहले ही दिन बुलडोजर चलाकर सीमांकन मिटाने की शिकायत पर सख्त रुख अपनाना हो या जर्जर मकान में रह रहे बुजुर्ग की परेशानी पर तुरंत नगर निगम को निर्देश देना यह बताता है कि चौहान केवल दफ्तरों के अफसर नहीं बल्कि हालात को मौके पर समझने वाले अधिकारी हैं।
पौड़ी और उत्तरकाशी जैसे चुनौतीपूर्ण जिलों में काम कर चुके डॉ. आशीष चौहान की पहचान तकनीक और इंसानी जज्बात के बेहतर तालमेल वाले अफसर की रही है। अब देहरादून में भी वही अंदाज दिखाई देने लगा है। राजधानी की आवाम को फिलहाल यही उम्मीद है कि यह नया नेतृत्व सिर्फ वादों तक नहीं रहेगा बल्कि राहत और इंसाफ दोनों जमीन पर नजर आएंगे।

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Author: Khushi

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