देहरादून:सरकारी योजनाओं की सबसे बड़ी चुनौती अक्सर उनकी घोषणा नहीं, बल्कि उनका समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन होता है। उत्तराखंड में यदि कुछ अधिकारी अपनी कार्यशैली के कारण अलग पहचान बना रहे हैं तो उनमें एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है। उनकी पहचान केवल बैठकों तक सीमित अधिकारी की नहीं, बल्कि फैसले लेने और उन्हें धरातल पर उतारने वाले प्रशासक की बन चुकी है।
देहरादून की बहुप्रतीक्षित आढ़त बाजार पुनर्विकास परियोजना इसका ताजा उदाहरण है। वर्षों से विभिन्न प्रक्रियाओं और तकनीकी अड़चनों के बीच आगे बढ़ रही इस महत्वपूर्ण परियोजना को गति देने के लिए बंशीधर तिवारी ने स्पष्ट समयसीमा तय करते हुए सभी विभागों को जवाबदेह बनाया है। उन्होंने साफ संदेश दिया है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्राथमिकता वाली इस परियोजना में अब अनावश्यक देरी की कोई गुंजाइश नहीं होगी।
उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे केवल निर्देश जारी करने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उनकी नियमित समीक्षा भी करते हैं। आढ़त बाजार परियोजना में लंबित रजिस्ट्रियों को तेजी से निपटाने के लिए विशेष व्यवस्था, निर्माण कार्यों की साप्ताहिक मॉनिटरिंग और विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने की पहल इसी सोच को दर्शाती है।
बंशीधर तिवारी ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि सार्वजनिक हित की परियोजनाओं में नियमों से समझौता नहीं किया जाएगा। जिन लोगों ने प्रतिकर राशि प्राप्त करने के बावजूद अब तक कब्जा नहीं छोड़ा है, उनके मामलों का स्वयं स्थलीय निरीक्षण करने और नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्णय उनकी प्रशासनिक दृढ़ता को दर्शाता है। यही कारण है कि उन्हें निर्णय लेने के साथ-साथ उन्हें लागू कराने वाले अधिकारी के रूप में देखा जाता है।
आढ़त बाजार पुनर्विकास परियोजना केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है। इसके पूरा होने पर देहरादून को एक आधुनिक, व्यवस्थित और सुविधायुक्त व्यापारिक केंद्र मिलेगा। बेहतर यातायात व्यवस्था, आधुनिक आधारभूत सुविधाएं और व्यापारियों के लिए सुव्यवस्थित माहौल राजधानी की तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
जनहित के प्रति संवेदनशीलता, कार्यों की निरंतर मॉनिटरिंग और परिणाम आधारित प्रशासनिक दृष्टिकोण ने बंशीधर तिवारी को प्रदेश के प्रभावी अधिकारियों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा किया है। उनकी कार्यशैली यह संदेश देती है कि यदि इच्छाशक्ति और जवाबदेही दोनों साथ हों, तो विकास परियोजनाएं वर्षों तक फाइलों में नहीं अटकतीं, बल्कि समय पर पूरी होकर जनता तक पहुंचती हैं।
आज जब जनता परिणाम चाहती है, तब बंशीधर तिवारी जैसे अधिकारी प्रशासन और आम लोगों के बीच विश्वास का मजबूत सेतु बनकर उभर रहे हैं। आढ़त बाजार परियोजना को मिली नई रफ्तार इसी बात का प्रमाण है कि दृढ़ नेतृत्व और स्पष्ट लक्ष्य के साथ विकास कार्यों को नई दिशा दी जा सकती है।








