योग ही स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन और सशक्त राष्ट्र निर्माण का आधार : बलदेव पाराशर

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संगठन शक्ति, राष्ट्र चिंतन और संस्कार आधारित समाज निर्माण पर हुआ गंभीर मंथन

राष्ट्र जीवन के विविध आयामों में संगठन की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने तथा समाज को संस्कारित, संगठित और जागरूक बनाने के उद्देश्य से आज एक महत्वपूर्ण आत्मीय बैठक का आयोजन बलदेव पाराशर के आवास पर हुआ। इस अवसर पर सुरेंद्र मित्तल, अनिल नंदा तथा राजेश सेठी की उपस्थिति रही।

बैठक केवल औपचारिक मुलाकात तक सीमित नहीं रही बल्कि इसमें संगठन के वर्तमान स्वरूप, समाज के भीतर वैचारिक मजबूती, राष्ट्रहित से जुड़े विषयों और आने वाले समय में संगठन की सक्रिय भूमिका को लेकर गंभीर चर्चा हुई। विचार मंथन का केंद्र यह रहा कि वर्तमान समय में समाज को जोड़ने, युवाओं को सकारात्मक दिशा देने और भारतीय संस्कृति आधारित जीवन मूल्यों को जनमानस तक और प्रभावी रूप से कैसे पहुंचाया जाए।

इस दौरान संगठन विस्तार, सेवा कार्यों की गति बढ़ाने, सामाजिक समरसता को मजबूत करने तथा राष्ट्र सर्वोपरि की भावना के साथ कार्य करने की आगामी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। यह भी विचार किया गया कि बदलते सामाजिक परिवेश में वैचारिक प्रतिबद्धता को मजबूत रखना और समाज के हर वर्ग तक पहुंच बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

बैठक में आगामी International Day of Yoga को लेकर भी विशेष मंथन हुआ। योग को केवल शारीरिक अभ्यास नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, अनुशासन, आत्मबल और स्वस्थ राष्ट्र निर्माण का आधार मानते हुए इसे समाज के बीच व्यापक रूप से ले जाने की रणनीति पर चर्चा की गई।

संघ की मूल विचारधारा सदैव व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण की रही है। यही कारण है कि ऐसी बैठकें केवल संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं बल्कि राष्ट्र के भविष्य, सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने का माध्यम बनती हैं। बलदेव पाराशर के आवास पर हुई यह आत्मीय लेकिन गंभीर बैठक आने वाले समय में संगठनात्मक गतिविधियों को नई दिशा, नई ऊर्जा और व्यापक सामाजिक विस्तार देने वाली मानी जा रही है।

जब विचार राष्ट्रहित के हों, उद्देश्य समाज जागरण का हो और संकल्प भारत की सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करना हो, तब ऐसी बैठकों का महत्व केवल संगठन तक सीमित नहीं रहता बल्कि वह राष्ट्र निर्माण की एक सतत प्रक्रिया का हिस्सा बन जाता है।

Khushi
Author: Khushi

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