

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड में शासन का एक नया और प्रेरणादायक अध्याय लिखा जा रहा है। “मुख्यसेवक संवाद” श्रृंखला के तहत मुख्यमंत्री सीधे जनता से संवाद कर रहे हैं, जो राज्य के लोकतांत्रिक मूल्यों को और भी सशक्त बना रही है। आज इसी कड़ी में मुख्यमंत्री धामी ने महिला मंगल दलों और युवक मंगल दलों के प्रतिनिधियों से संवाद किया। यह पहल सिर्फ एक संवाद भर नहीं है, बल्कि एक ऐसे समावेशी विकास मॉडल का हिस्सा है, जिसमें राज्य की जड़ों से जुड़े युवा और महिलाएं भी नीति निर्माण की प्रक्रिया में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।
इस कार्यक्रम में हर जनपद से आए प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव, जरूरतें और सुझाव मुख्यमंत्री के सामने रखे। यह संवाद सरकार और समाज के बीच एक जीवंत पुल का काम कर रहा है, जहां समस्याएं सिर्फ सुनी नहीं जा रही हैं, बल्कि उनके समाधान की दिशा में ठोस कदम भी उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री धामी की यह कार्यशैली उन्हें एक सामान्य राजनेता से ऊपर उठाकर एक “जनसेवक” के रूप में स्थापित करती है।
मुख्यसेवक संवाद की खास बात यह है कि यह केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि व्यवहारिकता और प्रतिबद्धता का प्रतीक बन चुका है। इससे पहले होमस्टे और स्टार्टअप संवाद जैसे कार्यक्रमों में भी सीएम धामी ने युवाओं और उद्यमियों के साथ चर्चा कर, उन्हें प्रोत्साहित करने और योजनाओं को जमीनी हकीकत से जोड़ने का कार्य किया है।
महिला मंगल दलों और युवक मंगल दलों को सशक्त करने के लिए राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाएं केवल घोषणाएं नहीं रह गई हैं, बल्कि उन पर तीव्र गति से अमल हो रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए स्वरोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में ठोस कार्य किए जा रहे हैं। वहीं, युवाओं के लिए स्टार्टअप नीति, स्किल डेवलपमेंट, स्पोर्ट्स सुविधाएं और स्वरोजगार के अवसर लगातार बढ़ाए जा रहे हैं।
“मुख्यसेवक संवाद” अब केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह उत्तराखंड में एक सामाजिक चेतना की लहर बन चुका है। मुख्यमंत्री धामी का यह दृष्टिकोण उन्हें एक संवेदनशील, दूरदर्शी और जमीनी नेता के रूप में स्थापित करता है। आम जनता, विशेष रूप से युवा और महिलाएं, उन्हें अपने प्रतिनिधि नहीं बल्कि अपने परिवार के सदस्य के रूप में देखने लगी हैं। यही वजह है कि यह श्रृंखला न केवल प्रशासनिक रूप से सफल हो रही है, बल्कि एक ऐतिहासिक सामाजिक आंदोलन का रूप भी ले रही है।








