
उत्तराखण्ड की वित्तीय आवश्यकताओं पर 16वें वित्त आयोग की बैठक में चर्चा
उत्तराखण्ड के सचिवालय में 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया जी एवं अन्य सदस्यों के साथ बैठक में राज्य की वित्तीय आवश्यकताओं, संरचनात्मक चुनौतियों और विशिष्ट भौगोलिक-सामाजिक परिस्थितियों पर चर्चा हुई। इस बैठक में राज्य की वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए।
राज्य की वित्तीय आवश्यकताएं
राज्य ने अपनी वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। इनमें से कुछ प्रमुख मुद्दे हैं:
– क्तिपूर्ति की आवश्यकता:राज्य ने “इनवॉयरमेंटल फेडरलिज्म” की भावना के अनुरूप क्षतिपूर्ति की आवश्यकता पर जोर दिया।
– वन आच्छादन का भार:राज्य ने कर-हस्तांतरण में वन आच्छादन के भार को वर्तमान से बढ़ाकर 20% तक किए जाने का सुझाव दिया।
राज्य की विशिष्ट आवश्यकताएं
राज्य की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भी कई सुझाव दिए गए। इनमें से कुछ प्रमुख सुझाव हैं:
– फ्लोटिंग पॉप्युलेशन का प्रबंधन:राज्य में बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के दृष्टिगत फ्लोटिंग पॉप्युलेशन के उचित प्रबंधन के लिए विशेष सहायता प्रदान करने की आवश्यकता पर चर्चा हुई।
– राजकोषीय अनुशासन:कर-हस्तांतरण की राज्यों के बीच हिस्सेदारी निर्धारण प्रक्रिया में राजकोषीय अनुशासन को “डिवोल्यूशन फॉर्मूले” का एक महत्वपूर्ण घटक बनाने का सुझाव दिया गया।
वित्तीय सहायता की आवश्यकता
राज्य ने अपनी वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वित्तीय सहायता की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इस संबंध में कुछ प्रमुख सुझाव हैं:
– रेवेन्यू नीड ग्रान्ट:राज्य ने “रेवेन्यू डेफिसिट ग्रान्ट” की जगह “रेवेन्यू नीड ग्रान्ट” लागू किए जाने का सुझाव दिया, जिससे राज्य की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप वित्तीय सहायता प्राप्त हो सके।
निष्कर्ष
इस बैठक में उत्तराखण्ड की वित्तीय आवश्यकताओं और संरचनात्मक चुनौतियों पर चर्चा हुई और राज्य की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कई सुझाव दिए गए। इन सुझावों को लागू करने से राज्य की वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिल सकती है।








