मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिए सख्त निर्देश: भ्रष्टाचार, अतिक्रमण और फर्जी दस्तावेजों पर zero tolerance नीति

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा भ्रष्टाचार, अतिक्रमण, दस्तावेज़ी सत्यापन और राज्य की पारंपरिक पहचान को लेकर लिए गए सख्त फैसले प्रदेश के प्रशासनिक चरित्र को एक नई दिशा देने का संकेत हैं। मुख्यमंत्री आवास में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में लिए गए निर्णयों से स्पष्ट है कि सरकार अब ज़मीनी स्तर पर सक्रियता दिखाने के मूड में है। एक तरफ जहां भ्रष्टाचार के विरुद्ध टोल फ्री नंबर 1064 के प्रचार को और अधिक प्रभावी बनाने पर बल दिया गया, वहीं दूसरी ओर धर्मांतरण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी सरकार का रुख सख्त नजर आया।

आधार कार्ड व अन्य सरकारी दस्तावेजों में सत्यापन को लेकर दी गई सख्त हिदायतें प्रशासनिक लापरवाही पर लगाम कसने की मंशा दर्शाती हैं। लंबे समय से यह देखने में आया है कि झूठे दस्तावेज़ों के आधार पर कई लाभार्थी सरकारी योजनाओं का अनुचित लाभ उठा लेते हैं। इसीलिए अब यदि दस्तावेज़ी प्रक्रिया में चूक होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई तय की जाएगी। यह निर्णय न केवल व्यवस्था में पारदर्शिता लाएगा, बल्कि जनता के बीच सरकार की विश्वसनीयता भी बढ़ाएगा।

सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण की समस्या से उत्तराखंड सहित पूरे देश के अनेक हिस्से जूझ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इस दिशा में न केवल निरंतर कार्यवाही जारी रखने को कहा है, बल्कि यह सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं कि जहां से अतिक्रमण हटाया जा चुका है, वहां पुनः कब्जा न होने पाए। इससे प्रशासनिक निगरानी और मजबूत होगी और स्थानीय स्तर पर सशक्त व्यवस्था विकसित की जा सकेगी। विशेष रूप से ‘शत्रु संपत्तियों’ की पहचान और उन पर हुए अतिक्रमण की रिपोर्ट मांगना, सरकार की गहरी मंशा को दर्शाता है कि वह किसी भी प्रकार की संपत्ति को अनियंत्रित नहीं छोड़ना चाहती।

सरकारी भवनों के निर्माण में स्थानीय श्रमिकों को प्राथमिकता देना एक दोहरा लाभ देने वाला कदम है। इससे जहां स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा, वहीं भवनों में राज्य की सांस्कृतिक और पारंपरिक वास्तुशैली को अपनाने की बात राज्य की सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल कही जा सकती है। उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में पारंपरिक वास्तुशैली न केवल पर्यावरण के अनुकूल होती है, बल्कि वह भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं से लड़ने में भी अधिक सक्षम होती है।

बॉर्डर क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और सघन चेकिंग अभियान चलाने का निर्देश प्रदेश की सीमाओं को लेकर सजगता को दर्शाता है। उत्तराखंड की सीमाएं चीन और नेपाल जैसे देशों से सटी हुई हैं, ऐसे में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना और सतर्क रहना बेहद आवश्यक है।

इस बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति और मुख्यमंत्री द्वारा लिए गए निर्णय यह स्पष्ट करते हैं कि प्रदेश सरकार अब नीतिगत घोषणाओं से आगे बढ़कर अमल की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। यदि इन निर्देशों का जमीनी स्तर पर ईमानदारी से पालन हुआ, तो यह न केवल प्रदेश की प्रशासनिक साख को मजबूत करेगा, बल्कि जनता का भरोसा भी सरकार पर और दृढ़ होगा।

Khushi
Author: Khushi

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