
असम सरकार ने अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। राज्य सरकार ने उन लोगों को भारत-बांग्लादेश सीमा पर नो-मैन्स लैंड में धकेलने की प्रक्रिया शुरू की है जिन्हें फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने “अवैध विदेशी” घोषित किया है।
क्यों हो रही है कार्रवाई?
असम के मुख्यमंत्री हिमंता विश्व शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में आदेश दिया था कि घोषित विदेशियों को, जिन्होंने कोई अपील नहीं की है, किसी भी तरह वापस भेजा जाए। इसी आदेश के तहत यह कार्रवाई की जा रही है।
क्या है नो-मैन्स लैंड?
नो-मैन्स लैंड भारत-बांग्लादेश सीमा पर एक निर्जन क्षेत्र है, जहां दोनों देशों की सीमा नहीं है। असम सरकार ने अवैध बांग्लादेशियों को इसी क्षेत्र में धकेल दिया है।
कितने लोगों को प्रभावित किया ह
कम से कम 49 लोगों को 27 और 29 मई को असम के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों से कथित रूप से नो-मैन्स लैंड में धकेला गया।
कोर्ट की भूमिका
गुवाहाटी हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिनमें परिजनों की जानकारी मांगी गई है और इस अभियान पर रोक लगाने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह एक हैबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें एक 26 वर्षीय युवक ने दावा किया है कि उसकी मां को पुलिस ने हिरासत में लिया और तब से उनकी कोई खबर नहीं है।
सरकार का पक्ष
असम के मुख्यमंत्री हिमंता विश्व शर्मा ने कहा कि अवैध प्रवासियों के दो वर्ग हैं- एक वो जो हाल ही में भारत में घुसे हैं, और दूसरे जिन्हें ट्रिब्यूनल द्वारा विदेशी घोषित किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में इस तरह की कई “पुश-बैक” कार्रवाई होंगी।








