

उत्तराखंड में रोपवे परियोजनाओं की प्रगति को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत परियोजनाओं और राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित नए रोपवे प्रोजेक्ट्स पर चर्चा हुई। आइए इस विषय पर विस्तार से चर्चा करते हैं:
*परियोजना की विशेषताएं:*
– *सोनप्रयाग से केदारनाथ रोपवे परियोजना*: 12.9 किमी लंबी यह परियोजना डिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और स्थानांतरण (DBFOT) मोड पर 4,081.28 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की जाएगी।
– *गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजना*: 12.4 किमी लंबी यह परियोजना भी DBFOT मोड पर विकसित की जाएगी।
– *डिज़ाइन क्षमता*: सोनप्रयाग से केदारनाथ रोपवे की डिज़ाइन क्षमता प्रति घंटे प्रति दिशा 1,800 यात्रियों की होगी, जबकि गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब रोपवे की डिज़ाइन क्षमता प्रति घंटे प्रति दिशा 1,100 यात्रियों की होगी।
*परियोजनाओं के लाभ:*
– *यात्रा समय में कमी*: सोनप्रयाग से केदारनाथ रोपवे परियोजना से यात्रा का समय 8-9 घंटे से घटकर लगभग 36 मिनट हो जाएगा, जबकि गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजना से यात्रा का समय घटकर 42 मिनट हो जाएगा।
– *आर्थिक विकास*: ये परियोजनाएं स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देंगी और रोजगार के अवसर प्रदान करेंगी।
– *पर्यटन को बढ़ावा*: रोपवे परियोजनाएं तीर्थाटन और पर्यटन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी¹ ²।
*परियोजना का महत्व:*
– *दुर्गम क्षेत्रों में कनेक्टिविटी*: रोपवे परियोजनाएं दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने में मदद करेंगी।
– *पर्यावरण अनुकूल*: रोपवे परियोजनाएं पर्यावरण अनुकूल हैं और धूलकणों के उत्सर्जन को कम करती हैं।
इस प्रकार, उत्तराखंड में रोपवे परियोजनाएं राज्य के आर्थिक विकास और पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।








