
राहुल गांधी के दावों पर चुनाव आयोग ने कसा तंज, कहा- ‘मैच हारने के बाद रेफरी को दोष देना नई आदत’। भारतीय निर्वाचन आयोग ने लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी की ओर से महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर किए गए आधारहीन और गलत दावों का पहले भी बिंदुवार जवाब दिया था और वास्तविक तथ्यों को सामने रखा था।
चुनाव आयोग का बयान:
चुनाव आयोग ने कहा कि राहुल गांधी का यह बयान कि चुनाव आयोग उनकी बात नहीं सुनता है, पूरी तरह से आधारहीन और तथ्यों से परे है। आयोग ने कहा कि राहुल गांधी को अपनी हार के लिए किसी और को दोष देने के बजाय अपनी पार्टी की रणनीति पर विचार करना चाहिए।
चुनाव आयोग की कार्रवाई:
चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के मामलों में कड़ी कार्रवाई की। आयोग ने राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार के दौरान धार्मिक और जातिगत अपीलों से बचने की सलाह दी।
राहुल गांधी के आरोप:
राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग उनकी बात नहीं सुनता है और भाजपा के इशारों पर काम करता है। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से काम करता है।
चुनाव आयोग का जवाब:
चुनाव आयोग ने राहुल गांधी को जवाब देते हुए कहा कि वह अपनी हार के लिए किसी और को दोष देने के बजाय अपनी पार्टी की रणनीति पर विचार करें। आयोग ने कहा कि वह हमेशा निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से काम करता है और चुनाव प्रक्रिया को स्वतंत्र और निष्पक्ष बनाने के लिए हर संभव प्रयास करता है।
सौंप दी जाती है.
आयोग ने आगे कहा था कि महाराष्ट्र चुनाव के दौरान मतदाता सूची को अंतिम रूप देने के बाद, 9,77,90,752 मतदाताओं के मुकाबले, प्रथम अपीलीय प्राधिकरण (डीएम) के समक्ष केवल 89 अपील दायर की गई और द्वितीय अपीलीय प्राधिकरण (सीईओ) के समक्ष केवल एक अपील दायर की गई. आयोग ने तब कहा था कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव, 2024 से पहले कांग्रेस या किसी अन्य राजनीतिक दल की ओर से कोई शिकायत नहीं थी.
चुनाव आयोग ने यह भी कहा था कि उसने 24 दिसंबर, 2024 को कांग्रेस को दिए अपने जवाब में ये सभी तथ्य सामने रखे थे, जो चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं. ऐसा प्रतीत होता है कि इस तरह के मुद्दों को बार-बार उठाकर इन सभी तथ्यों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया जा रहा है.
चुनाव आयोग ने पार्टी के आरोप को कहा शासन का अपमान
चुनाव आयोग ने एक बयान में कहा था, “मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान 1,00,427 मतदान केंद्रों के लिए ERO की ओर से नियुक्त 97,325 बूथ स्तर के अधिकारियों के साथ-साथ सभी राजनीतिक दलों की ओर से 1,03,727 बूथ स्तर के एजेंट भी नियुक्त किए गए थे, जिनमें कांग्रेस की ओर से 27,099 एजेंट नियुक्त किए गए थे. इसलिए, महाराष्ट्र की मतदाता सूची के खिलाफ उठाए गए ये निराधार आरोप कानून के शासन का अपमान हैं.”
गलत सूचना फैलाने पर चुनाव आयोग ने की आलोचना
आयोग ने गलत सूचना फैलाने के लिए कांग्रेस पार्टी की आलोचना भी की थी और इसे कानून के शासन का अपमान बताया था. उसने बयान में कहा था, “किसी की ओर से फैलाई जा रही कोई भी गलत सूचना न केवल कानून के प्रति अनादर का संकेत है, बल्कि अपने स्वयं के राजनीतिक दल की ओर से नियुक्त हजारों प्रतिनिधियों को भी बदनाम करती है और लाखों चुनाव कर्मचारियों को हतोत्साहित करती है, जो चुनावों के दौरान अथक और पारदर्शी तरीके से काम करते हैं.”
राहुल गांधी की टिप्पणी पर चुनाव आयोग ने जताई आपत्ति
राहुल गांधी की ‘चुनाव आयोग की निष्पक्षता से समझौता’ वाली टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताते हुए आयोग ने कहा था कि ऐसी टिप्पणियों का उद्देश्य चुनाव आयोग को बदनाम करना है, जो पूरी तरह से बेतुका है. आयोग की तरफ से पूरी बात क्रमवार रख देने के बाद एक बार फिर से राहुल गांधी ने वही किया जो वह पहले कर चुके थे, उन्होंने एक बार फिर लेख लिखकर महाराष्ट्र चुनाव और चुनाव आयोग दोनों पर सवाल उठाया. जिसका जवाब चुनाव आयोग की तरफ से दिया गया।








