“पूप रूल: फैसले लेने में तेजी लाने का अनोखा  तरीका”

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अक्सर सोशल मीडिया पर कोई न कोई ट्रेंड चलता रहता है. आजकल सोशल मीडिया पर एक और नया और थोड़ा अजीब तरीका वायरल हो रहा है, जिसे पूप रूल कहा जा रहा है. इस तरीके का नाम भले ही अजीब लगे, लेकिन माना जा रहा है कि यह तरीका लोगों को उनके पुराने और बेकार सामान से जल्दी छुटकारा दिला रहा है.
अमेरिकी कंटेंट क्रिएटर ने शेयर किया था यह अनोखा रूल
अमेरिका की एक कंटेंट क्रिएटर और लाइफस्टाइल इन्फ्लुएंसर अमांडा जॉनसन ने पूप रूल को सोशल मीडिया पर शेयर किया था, जिसमें उन्होंने बताया था कि इस रूल से कैसे उसने अपने घर में पड़ी सालों पुरानी चीजों को छांट कर फेंका था.।

क्या है पूप रूल ?

कंटेंट क्रिएटर अमांडा जॉनसन के अनुसार पूप रूल वह होता है जिसमें आप किसी सामान को लेकर उलझन में हो कि इस सामान को रखना है या फेंकना है. ऐसे में आप खुद से पूछे कि अगर इस सामन पर पूप लगा होता तो आप क्या करते? क्या आप तब भी इस सामान को रखते या फेंक देते? अमांडा जॉनसन इस रूल को लेकर और बताती हैं कि अपने आप से ये सवाल पूछने के बाद अगर आपका जवाब नहीं आता है तो समझ जाइए कि वह सामन अब आपके घर में रहने लायक नहीं है. अमांडा के अनुसार, यह सुनने में थोड़ा अजीब लगता है लेकिन वह बताती हैं कि जब भी आप चीज के बारे में ईमानदारी से सोचेंगे तो आपके घर से बहुत सारा फालतू सामान अपने आप बाहर हो जाएगा.
क्या सच में काम करता है ये रूल?
कंटेंट क्रिएटर अमांडा बताती हैं कि उसने इस रूल के जरिए ऐसे कपड़े बाहर निकाल फेंके जिन्हें उन्होंने छह महीने से नहीं पहना था. इसके अलावा उसने इस रूल से घर में पड़ी कई ऐसी फालतू चीजें निकाली जो कभी यूज नहीं की थी या जो कभी काम नहीं आ सकते हैं. अमांडा कहती हैं कि ये रूल उन लोगों के लिए बहुत फायदेमंद होता है जो अपनी चीजों से भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं और उनको उन चीजों से दूर होने में काफी कठिनाई होती है.
जरूरत से ज्यादा सामान से मानसिक शांति होती है कम
कई डॉक्टर और एक्सपर्ट्स के अनुसार, घर में जरूरत से ज्यादा सामान और अव्यवस्था होना न केवल आंखों को चुभता है बल्कि यह मानसिक सेहत पर भी असर डालता है. कई रिसर्च बताती हैं कि बिखरे हुए और सामान से भरे पड़े कमरों में रहने वाले लोगों में एकाग्रता की कमी आ जाती है. इसके साथ ही उन्हें मानसिक थकावट भी हाेने लगती है और निर्णय लेने की क्षमता भी इससे प्रभावित होती है. ऐसे में पूप रूल को इन लोगों और खासकर एडीएचडी के मरीजों के लिए प्रभावी माना गया है क्योंकि उनके लिए यह रूल किसी चीज को साफ और शांति से देखने में मदद कर सकता है.
भारत में कितना कारगर यह रूल
हमारे देश में भावनात्मक जुड़ाव और किसी भी चीज के जरिए यादों को संजोकर रखने की परंपरा बहुत गहरी मानी जाती है. इन चीजों में हर छोटा से छोटा सामान भी हो सकता है. जिसके लिए हमें पता होता है कि यह कभी काम नहीं आएगा लेकिन फिर भी हम उस सामान को सालों तक रखते हैं और फेंकने की हिम्मत नहीं जुटा पाते, लेकिन माना जा रहा है कि पूप रूल इसके लिए भारत में भी घर से फालतू की चीजों को निकालने के लिए फायदेमंद हो सकता है।

Khushi
Author: Khushi

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