“देहरादून का जन दर्शन बना जन विश्वास का मंच, डीएम सविन बंसल की सख्ती और संवेदनशीलता दोनों का दिखा असर”

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जिला मुख्यालय में जब ‘जनता दर्शन’ सजता है, तो सिर्फ शिकायतें नहीं आतीं—साथ में आती हैं उम्मीदें, आस्था और थोड़ा बहुत डर भी कि कहीं फिर से सिर्फ ‘आश्वासन’ न मिले। मगर देहरादून में जिलाधिकारी सविन बंसल के नेतृत्व में हुए आज के जनदर्शन ने न सिर्फ शिकायतें सुनीं, बल्कि मौके पर फैसले लेकर लोगों का भरोसा भी जीता।

दिव्यांग इजाजउद्दीन की बेटी की शादी में प्रशासन पिता बना—25 हजार रुपये की मदद की तत्काल स्वीकृति इस बात की मिसाल है कि अब ‘फाइलें नहीं, फैसले’ चल रहे हैं। अतियी मन्नो को रोजगार और उसकी बेटी को नंदा-सुनंदा शिक्षा योजना से जोड़ना बताता है कि अब योजनाएं सिर्फ कागजों में नहीं, ज़मीन पर भी चल रही हैं।

लेकिन क्या यह प्रशासनिक सजगता रोज़ की बात बन पाएगी? ये वो सवाल है जो हर किसी के मन में तैरता है।

जनसुनवाई में बुजुर्ग बिन्द्रा देवी की रजिस्ट्री के लिए हो रही दौड़-धूप भी सामने आई। जिस समाज में वृद्ध महिला को डीलर बहला-फुसलाकर चक्कर कटवाएं, वहाँ जब वरिष्ठ नागरिक सेल सक्रिय होकर कार्रवाई का निर्देश दे, तो लगता है शायद कुछ बदल रहा है।

भूमाफियाओं के खिलाफ मोर्चा भी खुलेआम दिखा। ब्रिगेडियर सुशील कुमार नेगी से लेकर खलंगा नालापानी और किद्दूवाला के मामलों तक, जिलाधिकारी ने न सिर्फ सुनवाई की, बल्कि अतिक्रमण के मामलों में ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ की सख्ती से मांग की। लगता है अब भूमाफिया को “रसूख” नहीं “रपट” का सामना करना पड़ेगा।

और हाँ, बैंक की आनाकानी का मामला भी दिलचस्प रहा। जब लोक अदालत का निस्तारण मानने से इनकार करे बैंक, तो डीएम खुद बैंक मैनेजर को तलब करते हैं। यही प्रशासनिक गरिमा की मिसाल है।

यह जनदर्शन किसी हफ्ते भर के प्रोटोकॉल का हिस्सा नहीं, बल्कि एक ऐसा मंच बनता दिख रहा है, जहाँ न्याय केवल उच्चारण नहीं, अनुभव बन रहा है।

सवाल वही पुराना है—कब तक? क्या यही रफ्तार बरकरार रहेगी? क्या हर फरियादी को इसी तरह राहत मिलेगी?

फिलहाल, देहरादून में तो “जन दर्शन” के मायने बदलते नज़र आ रहे हैं—यहाँ अब शिकायती चेहरों की जगह सुकून की लकीरें उभरने लगी हैं।
यह सरकार की जनसंकल्प, और डीएम की संवेदनशीलता, दोनों का सधा हुआ समन्वय लगता है।

पर देखने वाली बात ये होगी कि ‘फॉलोअप’ की ये गर्मी कहीं आने वाले महीनों में कागजी ठंडक में न बदल जाए।

Khushi
Author: Khushi

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