“अब सर्जरी के लिए नहीं जाना पड़ेगा बाहर, शामली को मिला अपना एमबीबीएस एमएस सुपर सर्जन”

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कभी शामली जनपद का नाम आते ही लोगों के चेहरे पर चिंता की रेखाएं उभर आती थीं, खासकर जब बात गंभीर बीमारी या सर्जरी की होती थी। एक ज़माना था जब यहां के मरीजों को दिल्ली, मेरठ, मुज़फ्फरनगर के अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते थे, और सफर से पहले खुदा से दुआ करनी पड़ती थी कि रास्ता भी सही रहे और इलाज भी। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। अब शामली को भी गर्व करने की वजह मिल चुकी है — डॉ अमित चिकारा।

ऊन गांव जैसे बेहद साधारण परिवेश से निकलकर एमबीबीएस, एमएस की डिग्री लेकर सर्जरी के क्षेत्र में कमाल करने वाले डॉ अमित चिकारा, आज शामली के लिए वो उपलब्धि बन चुके हैं, जिसकी लंबे समय से दरकार थी। वो सिर्फ डॉक्टर नहीं हैं, बल्कि उम्मीद की वो रोशनी हैं, जिसने मरीजों को इलाज के लिए पलायन करने से रोका है।

सोचिए, जब एक सर्जरी के लिए परिवार को ट्रेनों-बसों के धक्के खाने पड़ते थे, अब वही इलाज शामली में, अपने ही जिले में मिल रहा है। और इलाज भी ऐसा कि मरीज कहता है – “दिल्ली गए होते तो शायद डर में ही आधा बीमार पड़ जाते, यहां तो डॉक्टर मुस्कुरा कर ऐसा विश्वास देते हैं कि आधी बीमारी यूं ही छूमंतर।”

आज के दौर में जब कुछ डॉक्टर खुद को भगवान समझने लगे हैं, डॉ अमित चिकारा इंसान बने रहकर देवता सरीखा काम कर रहे हैं। उनकी सर्जरी करने की शैली जितनी प्रोफेशनल है, मरीजों से व्यवहार उतना ही घरेलू। न कोई दिखावा, न कोई ड्रामा। एक सामान्य गांव के इस डॉक्टर ने साबित किया है कि बड़ा डॉक्टर बनने के लिए बड़े शहर की ज़रूरत नहीं, बड़ा दिल और बड़ी नीयत चाहिए।

यह शामली के लिए सिर्फ एक डॉक्टर नहीं, बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांति जैसा है। अब किसी को सर्जरी के लिए मेरठ के महंगे अस्पतालों की ओपीडी में घंटों लाइन नहीं लगानी पड़ती। न अब किसी को दिल्ली के हॉस्पिटल में जाकर ‘सिफारिश’ लगानी होती है। अब इलाज यहीं होता है — अपने डॉक्टर से, अपनी भाषा में, अपने विश्वास के साथ।

डॉ अमित चिकारा ने शामली को वो दिया है, जो सरकारी योजनाएं और घोषणाएं वर्षों में नहीं दे पाईं — एक भरोसेमंद सर्जन। एक ऐसा नाम, जिस पर पूरा जनपद आंख मूंदकर भरोसा कर सके।

कई बार लोग कहते हैं कि छोटे जिले बड़े डॉक्टर नहीं दे सकते। पर शायद वो डॉ अमित चिकारा से कभी मिले नहीं। उनका नाम ही अब जवाब बन चुका है।

शामली अब बीमार नहीं दिखती, क्योंकि यहां इलाज देने वाला कोई है — जो डॉक्टर भी है और दुआ भी।

Khushi
Author: Khushi

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