प्रशासनिक चमत्कार: डीएम सविन बंसल ने 24 घंटे में बदल दी बटोली गांव की तक़दीरएक निरीक्षण, एक फैसला और प्रशासनिक चमत्कार—बटोली को 24 घंटे में मिला नया जीवनमार्ग

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देहरादुन डीएम सवीन बंसल

सिर्फ एक निरीक्षण… और तस्वीर बदल गई।

बटोली गांव में भारी बारिश से तबाही मची, रास्ता टूट गया, लोगों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट गया। ऐसे में कोई VIP बयान देकर चला जाता, कोई जांच कमेटी बना देता, और कोई ‘फंड की कमी’ का रोना रो देता। लेकिन यहां हुआ उल्टा—डीएम सविन बंसल आए, देखा, और 24 घंटे के भीतर वैकल्पिक रास्ता तैयार।

अब इसे क्या कहें? प्रशासनिक मशीनरी की रफ्तार या संवेदना से चलने वाला सिस्टम? शायद दोनों। जहां आमतौर पर फाइलों को टेबल से टेबल घूमने में हफ्ते लग जाते हैं, वहीं यहां मात्र एक निरीक्षण के बाद रास्ता तैयार हो गया, वो भी पहले से छोटा और बेहतर।

डीएम ने सिर्फ रास्ता नहीं बनवाया, उन्होंने विश्वास की पटरी भी तैयार की। सुदूरवर्ती गांव बटोली में, जहां पहुंचने के लिए अधिकारी अक्सर मौसम का बहाना बना लेते हैं, वहाँ डीएम खुद पहुँचे और कहा—”गांव के दरवाज़े तक राहत पहुँचेगी, दफ्तर की चारदीवारी से नहीं।”

और राहत पहुंची भी।
3.84 लाख रुपये का एडवांस चेक—हर परिवार को 4-4 हज़ार रुपये किराए के लिए।
24×7 मैनपावर और मशीनरी तैनात—रास्ता दुरुस्त रखने के लिए।
15 दिन में अस्थायी हेलीपेड—ताकि ज़रूरत पड़े तो हेलिकॉप्टर से भी मदद मिले।
गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए नियमित एएनएम दौरा—क्योंकि जान बचाने के लिए सड़क ही नहीं, सेहत भी चाहिए।

यह सब महज भाषण नहीं, जमीनी क्रियान्वयन है। डीएम ने ये साबित किया कि प्रशासनिक कुर्सी ‘सिर्फ आदेश देने’ की नहीं होती, समझने और समाधान देने की होती है।

आज जब कई अधिकारी समस्याओं की रिपोर्ट बनवाने में ही महीने बिता देते हैं, तब एक कदम से समाधान देने वाले डीएम जैसे अफसर व्यवस्था में फिर से भरोसा जगाते हैं।

कह सकते हैं, बटोली गांव में सिर्फ वैकल्पिक रास्ता नहीं बना, प्रशासन और जनता के बीच नया रास्ता बना है—सीधा, छोटा और भरोसे से भरा हुआ।

Khushi
Author: Khushi

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