डीएम सविन बंसल का ऐतिहासिक कदम: हेलीकॉप्टर छोड़ ढाई घंटे पैदल चलकर सुनी जनता की पीड़ा

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अपने ऐतिहासिक कार्यों के लिए जाने जाएंगे डीएम सविन बंसल। यह कोई साधारण प्रशंसा नहीं, बल्कि जनता की जुबान है, जो हर दिन सैकड़ों मुलाकातों के बाद अपने अनुभव से कह रही है। एक अफसर जो रोज़ाना 200 से ज्यादा लोगों से मिलता है, हर शिकायत सुनता है, मौके पर समाधान निकालता है और फिर अगले दिन फिर उसी जोश से जनता के बीच उतरता है—वह सिर्फ आईएएस नहीं, बल्कि जनता का असली सेवक है।

आज जब अफसरों की एक पूरी पीढ़ी “फाइल संस्कृति” में उलझकर जनता से दूरी बना चुकी है, वहां सविन बंसल जैसे डीएम यह साबित कर रहे हैं कि आईएएस का असली मतलब “Indian Administrative Service” ही नहीं, बल्कि “In All Situations” जनता के साथ खड़ा रहना भी है। उनकी कर्मठता, निडरता, दृढ़ संकल्प और इच्छाशक्ति उन्हें बाकी अफसरों की भीड़ से अलग करती है।

देहरादून जैसे बड़े और संवेदनशील जिले में जहाँ आमतौर पर अफसर “शोपीस” बन जाते हैं, वहां बंसल जनता के बीच उतरकर “ग्राउंड जीरो” पर न सिर्फ राहत कार्यों को दिशा देते हैं, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि नेतृत्व कुर्सी पर बैठकर नहीं, बल्कि धूल-मिट्टी और मलबे के बीच खड़े होकर किया जाता है। यही वजह है कि लोग उन्हें “आईएएस ऐसा भी” कहकर याद करते हैं।

तंज यह है कि जिन अफसरों और जनप्रतिनिधियों की चर्बी कुर्सी पर बैठ-बैठकर इतनी बढ़ गई है कि वे जनता का चेहरा तक भूल चुके हैं, उन्हें यह देखना चाहिए कि एक डीएम रोज़ सैकड़ों लोगों से मिलकर कैसे प्रशासन और जनता के बीच की दूरी खत्म करता है। और व्यंग यह है कि जो नेता हर दिन जनता से मिलने के दावे करते हैं, उनकी चौपालें सिर्फ भाषण तक सिमट जाती हैं, जबकि सविन बंसल की चौपाल सीधे समाधान तक पहुँचती है।

इतिहास उन्हीं के नाम होता है, जो निडर होकर फैसले लेते हैं, जो भीड़ से अलग रास्ता चुनते हैं, और जो जनता के लिए अपनी नींद और आराम तक कुर्बान कर देते हैं। आज देहरादून की जनता भरोसे से कह सकती है कि उनके डीएम सिर्फ कागज़ पर अफसर नहीं, बल्कि दिलों में बसने वाला नाम हैं।

और यह भी सच्चाई है कि बाकी अफसरों को उनसे सीख लेनी ही होगी। क्योंकि जनता अब हेलीकॉप्टर से झाँककर दिखाए गए नकली राहत कार्यों पर विश्वास नहीं करती, जनता उस अफसर को सलाम करती है जो उनके साथ उसी पगडंडी पर चलता है, उनके ही थाल में बैठकर भोजन करता है और उनकी तकलीफ को अपनी तकलीफ मानता है।

किसी ने ठीक कहा है—कुर्सी पर बैठकर शासन करना आसान है, लेकिन जनता के दिलों में राज करना सबसे मुश्किल। और यही काम सविन बंसल ने कर दिखाया है।

एक आईएएस ऐसा भी… जो इतिहास बन रहा है, और बाकी अफसरों को आईना दिखा रहा है।

Khushi
Author: Khushi

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