कोटद्वार की संघर्षशील विधायक ऋतु खण्डूडी ने युवाओं के साथ मिलकर नशे के खिलाफ मैराथन में दिखाई नेतृत्व की ताकत

SHARE:

कोटद्वार का बीएल चौकी ग्राउंड इस बार केवल खेल का मैदान नहीं, बल्कि एक संदेश देने का मंच बन गया। “नशा मुक्त भारत – नमो युवा दौड़” केवल एक हाफ मैराथन नहीं थी, बल्कि उस सोच का हिस्सा थी जिसमें युवा ऊर्जा को नशे के अंधकार से निकालकर खेलों की रोशनी की ओर मोड़ा जा रहा है। और इस दिशा में सबसे आगे खड़ी थीं कोटद्वार की विधायक व विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण, जिन्हें अक्सर विधानसभा की औपचारिक कुर्सी पर देखा जाता है, मगर मैदान में युवाओं के बीच उनका जज़्बा ही अलग तस्वीर पेश करता है।

यह विडंबना ही है कि पहाड़ी इलाकों में जहां प्रकृति स्वास्थ्य का खजाना समेटे बैठी है, वहीं नशे की लत समाज की जड़ों को खोखला कर रही है। ऐसे में सेवा पखवाड़ा के तहत यह मैराथन महज दौड़ नहीं थी, बल्कि नशे के खिलाफ एक प्रतीकात्मक जंग थी। ऋतु खण्डूडी ने जब युवाओं को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, तो यह दृश्य किसी रस्मी कार्यक्रम जैसा नहीं लगा—बल्कि लगा जैसे कोटद्वार की एक महिला विधायक अपने क्षेत्र की नई पीढ़ी को जीवन की असली दिशा दिखाने निकली हो।

यह कहना गलत नहीं होगा कि ऋतु खण्डूडी कोटद्वार की संघर्षशील प्रतिनिधि हैं। उनके पास केवल पद की ताकत नहीं, बल्कि उस जमीन से जुड़ाव है जो जनता के दिलों में जगह बनाता है। यह दौड़ उनके लिए केवल दौड़ नहीं थी—यह एक संदेश था कि “खेल से अनुशासन आता है और अनुशासन से समाज की दिशा बदलती है।” उनका यह कहना कि युवा राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत हैं, सच में केवल भाषण का हिस्सा नहीं लगा बल्कि उनकी अपनी राजनीतिक यात्रा का भी आईना लगा, जो लगातार संघर्ष और अनुशासन से गुज़री है।

विजेताओं को सम्मानित करना भी मात्र पुरस्कार बांटने की औपचारिकता नहीं थी, बल्कि यह जताना था कि मेहनत करने वालों को पहचान मिलनी चाहिए। खासकर विद्यालय बालिका वर्ग की विजेता निकिता, सोनाक्षी और पीहू के चेहरे पर चमक यह साबित कर रही थी कि यदि अवसर मिले तो पहाड़ की बेटियां किसी भी मैदान में पीछे नहीं हैं। यही तस्वीर शायद ऋतु खण्डूडी को सबसे ज्यादा सुकून देती है, क्योंकि वह खुद राजनीति में संघर्ष करती आई हैं और जानती हैं कि आगे बढ़ने का स्वाद कितना कठिन परिश्रम मांगता है।

यह आयोजन नशा छोड़कर स्वस्थ जीवन अपनाने का संदेश देने में सफल रहा। लेकिन इसके साथ-साथ यह भी दिखा कि जब नेतृत्व खुद युवाओं के बीच उतरता है तो केवल भाषण नहीं, बल्कि कर्म ही प्रेरणा बनता है। कोटद्वार की विधायक ऋतु खण्डूडी ने इस आयोजन के ज़रिए एक बार फिर यह साबित किया कि वह केवल विधानसभा की कुर्सी तक सीमित नहीं, बल्कि मैदान में संघर्ष करती हुई महिला विधायक हैं—जो नशे के खिलाफ जंग से लेकर विकास की दौड़ तक, हर मोर्चे पर अपने क्षेत्र के साथ दौड़ने को तैयार हैं।

Khushi
Author: Khushi

Leave a Comment

सबसे ज्यादा पड़ गई