कण्वाश्रम में झाड़ू लेकर उतरीं विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी, स्वच्छता संग समाज सेवा का दिया संदेश

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कोटद्वार का कण्वाश्रम कल से ही चर्चा में है। वजह साफ है—यहां विधानसभा अध्यक्ष और विधायक कोटद्वार ऋतु खण्डूडी भूषण खुद झाड़ू उठाए नज़र आईं। नेता जब कूड़ा उठाते दिखते हैं, तो जनता की आंखों में चमक आ ही जाती है। वैसे भी आजकल राजनीति में सेल्फी विद झाड़ू का ट्रेंड खूब चलन में है।

अब मानना पड़ेगा, ऋतु खण्डूडी जी ने न सिर्फ झाड़ियां काटीं बल्कि कूड़ा भी उठाया और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव भी कराया। नेता लोग ज़्यादातर “फोटो खिंचवा कर” निकल लेते हैं, लेकिन यहां उन्होंने खुद पसीना बहाया। इससे जनता को भी संदेश गया कि अगर विधानसभा अध्यक्ष झाड़ू चला सकती हैं, तो आम आदमी क्यों नहीं?

अभियान का मकसद भी बड़ा दिलचस्प रहा—प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिवस पर “सेवा पखवाड़ा।” यानी अब जन्मदिन भी सीधे सेवा से जुड़ा। न केक, न गुब्बारे—बल्कि वृक्षारोपण, रक्तदान और स्वच्छता। देखिए राजनीति किस तरह संस्कृति और अध्यात्म के तड़के के साथ नया रंग ले रही है।

कण्वाश्रम को साफ़ करने का फैसला भी प्रतीकात्मक है। यह वही जगह है जहां राजा भरत का जन्म हुआ था, जिनके नाम पर भारतवर्ष पड़ा। यानी इतिहास, धर्म और स्वच्छता—तीनों का संगम। जनता भी सोच रही होगी कि “वाह, अब हमारा आध्यात्मिक धरोहर स्थल गंदगी से मुक्त होगा।”

और हां, यहां एक खास रंग यूथ फाउंडेशन के नौजवानों ने भी चढ़ाया। आर्मी ट्रेनिंग लेकर लौटे ये युवा, हाथ में कूड़ा उठाने की थैली थामे दिखे। सेना में भर्ती की तैयारी और समाज सेवा का कॉम्बो—यानी फिटनेस भी और देशभक्ति भी।

सबसे बड़ा फायदा ये हुआ कि लोग आपस में बात कर रहे हैं—“अरे भाई, विधायक जी भी झाड़ू लगाने लगीं, अब हम भी गंदगी फैलाएंगे तो शर्मिंदगी होगी।” यह असर राजनीति से ज़्यादा समाज पर पड़ेगा।

लेकिन यहां एक व्यंग्य भी बनता है—नेता जी अगर गंदगी को इसी तरह हटाने लगें, तो राजनीतिक गंदगी का क्या होगा? काश, झाड़ू सिर्फ मंदिर की सीढ़ियों तक सीमित न रहे बल्कि भ्रष्टाचार और वोट-बैंक की धूल भी साफ़ कर दे।

फिलहाल, कोटद्वार की जनता खुश है कि उनका कण्वाश्रम साफ़ हुआ और नेताओं ने दिखाया कि सेवा सिर्फ भाषण से नहीं होती, हाथ गंदे करके भी की जाती है। अब यह अभियान दिखावे तक सीमित रहता है या स्थायी बदलाव लाता है, ये वक्त बताएगा।

Khushi
Author: Khushi

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