भू-माफियाओं पर भारी बंशीधर तिवारी- देहरादून में अवैध प्लॉटिंग और निर्माणों पर बुलडोज़र की सख्त कार्रवाई

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देहरादून की जमीनों पर लंबे वक्त से भू-माफिया ऐसे दौड़ लगा रहे थे, जैसे शहर उनकी पैतृक संपत्ति हो — लेकिन अब खेल पलट चुका है। बंशीधर तिवारी नाम अब भू-माफियाओं के कानों में वैसे ही गूंज रहा है, जैसे किसी जमाने में कोर्ट के नोटिस की आवाज़ गूंजती थी। उन्होंने कुर्सी नहीं संभाली, मोर्चा संभाला है — और वो भी मैदान में उतरकर।

शहर के नक्शे पर जो-जो “इन्क्लेव” उग आए थे, वो अब बुलडोज़र की लाइन में हैं। कहीं श्रीराम इन्क्लेव तो कहीं बालाजी इन्क्लेव, सबका एक ही हाल — बुलडोज़र और सीलिंग का न्याय। यह कोई दिखावे की कार्रवाई नहीं, बल्कि सिस्टम के भीतर सोए उस आत्मविश्वास का पुनर्जागरण है, जो सालों से भू-माफियाओं के पैसों और पकड़ में दबा हुआ था।

तिवारी की कार्यशैली में एक खासियत है — वो अफसरों वाली ठसक नहीं दिखाते, बल्कि ईमानदार सख्ती दिखाते हैं। उनका यह संदेश बिल्कुल साफ है — “बिना स्वीकृति न प्लॉट कटेगा, न मकान खड़ा होगा।” देहरादून को सजाने-संवारने के इस मिशन में वो खुद मैदान में उतरते हैं, ताकि हर कार्रवाई का असर लोगों के मन तक पहुँचे।

भू-माफियाओं को अब समझ आ गया होगा कि यह वो दौर नहीं जब नोटों के दम पर नक्शे पास हो जाया करते थे। अब नक्शा पास कराने के लिए नियमों का पालन जरूरी है।
बंशीधर तिवारी ने दिखा दिया कि सरकारी कुर्सी पर बैठा आदमी अगर ईमानदार नीयत और दृढ़ इच्छाशक्ति रखे, तो व्यवस्था बदलना कोई सपना नहीं।

देहरादून के लोग अब पहली बार देख रहे हैं कि जब प्रशासन चाहता है, तो “अवैध” सिर्फ शब्द नहीं, हकीकत में मिट्टी में मिल जाता है। तिवारी की यह मुहिम सिर्फ बुलडोज़र की आवाज़ नहीं, बल्कि व्यवस्था की रीढ़ की वापसी है — जो अब भू-माफियाओं पर भारी पड़ चुकी है।

Khushi
Author: Khushi

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