
कभी-कभी बड़े शहरों की चमक से दूर, असली प्रेरणा छोटे गांवों की मिट्टी से उठती है। उत्तरकाशी का झाला गांव इसका जीता-जागता उदाहरण है — जहां युवा सिर्फ बातें नहीं कर रहे, बल्कि प्रकृति को प्रणाम कर, अपने हाथों से उसकी सेवा कर रहे हैं। “थैंक यू नेचर” नाम सुनकर भले ही यह कोई साधारण सफाई अभियान लगे, पर यहां यह एक संस्कार बन चुका है।
प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री धामी तक ने इन युवाओं की पहल को सराहा — और यह कोई औपचारिक तारीफ नहीं थी, बल्कि एक सच्चे बदलाव की पहचान थी। आखिर ऐसे समय में, जब लोग “सेल्फी विद गार्बेज” तक डाल देते हैं, झाला गांव के युवा चुपचाप प्रकृति को धन्यवाद कह रहे हैं।
गांव के युवा प्रधान अभिषेक रौतेला का विजन “थैंक यू नेचर” अब किसी सरकारी योजना की तरह नहीं, बल्कि आत्मीय जिम्मेदारी की तरह फैल रहा है। बच्चे स्कूल के बाद कूड़ा उठाते हैं, युवा अपने अवकाश के दिन श्रमदान में लगाते हैं, और महिलाएँ घर-आंगन को साफ रखकर वसुंधरा को सजाती हैं। ये नारे नहीं








