‘कुमाऊँ द्वार महोत्सव-2025’ में सीएम धामी का सांस्कृतिक संदेश — परंपरा के रंगों से रचा विकास का नया सुर

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हल्द्वानी के ‘कुमाऊँ द्वार महोत्सव-2025’ में जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मंच पर पहुंचे, तो ऐसा लगा मानो लोक संस्कृति और प्रशासनिक संकल्प एक साथ ताल पर थिरक रहे हों। भीड़ में न ढोल की थाप थमी, न जोश की कमी दिखी। और क्यों न हो — आखिर मुख्यमंत्री खुद प्रदेश की संस्कृति के असली ‘ब्रांड एंबेसडर’ जो बन चुके हैं।

धामी सरकार का ये रुख अब सिर्फ बयानबाज़ी नहीं रह गया, बल्कि ‘ऑपरेशन कलनेमि’ के ज़रिए उन्होंने साफ़ कर दिया कि प्रदेश की परंपरा और संस्कृति से खिलवाड़ करने वालों को अब मंच नहीं, सज़ा मिलेगी। यह वही मुख्यमंत्री हैं जो लोकनृत्य के रंगों को केवल मंच तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि उसे गांव-गांव, स्कूलों, आयोजनों और सरकारी योजनाओं में पिरो देना चाहते हैं।

आज जब देश के कई हिस्सों में आधुनिकता के नाम पर संस्कृति को ‘पुराना फैशन’ मान लिया गया है, तब धामी ने उसे अपनी पहचान बना लिया है। उनका संदेश सीधा है — “संस्कृति ही हमारी शक्ति है।” और इस संदेश में व्यंग का भी सौंदर्य है, क्योंकि यह उन्हीं को आईना दिखाता है जो संस्कृति की दुहाई देकर उसे भुला बैठे हैं।

प्रदेश की अस्मिता को सहेजने की इस कोशिश में मुख्यमंत्री धामी एक ऐसे संचालक की तरह दिखे जो केवल ताल नहीं पकड़ते, बल्कि सुर भी ठीक रखते हैं। अब सवाल यही है — क्या इस सांस्कृतिक पुनर्जागरण का संगीत आने वाले वर्षों में विकास की नई धुन रचेगा, या फिर राजनीति के ढोल में कहीं इसकी आवाज़ धीमी पड़ जाएगी? अभी तो मंच पर तालियाँ गूंज रही हैं — और इस बार तालियाँ सच में संस्कृति के नाम की हैं।

Khushi
Author: Khushi

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