
कभी-कभी किसी आयोजन की सफलता मंच पर नहीं, कंट्रोल रूम में लिखी जाती है — और देहरादून में पीएम मोदी के कार्यक्रम ने यही साबित किया। अगर मैदान में धामी का मैनेजमेंट चमका, तो सूचना के मोर्चे पर डीजी बंशीधर तिवारी का सिस्टम गूंज उठा।
इस बार सूचना विभाग महज़ पोस्टर और प्रेस रिलीज़ तक सीमित नहीं रहा — यह एक “कमांड सेंटर” बन गया। सूचनाएं सटीक, समय पर और सुव्यवस्थित… हर अपडेट जनता तक पहुंची, और हर अफवाह दम तोड़ती नजर आई। जिस भरोसे की नींव सूचना पर टिकती है, उसे तिवारी ने लोहे जैसा मजबूत कर दिखाया।
माना जा रहा है कि जिस तरह प्रशासन ने ट्रैफिक का मोर्चा संभाला, उसी अंदाज़ में बंशीधर तिवारी ने “सूचना ट्रैफिक” को जाम होने से बचाया। हज़ारों की भीड़, दर्जनों एजेंसियां, सैकड़ों कैमरे और लाखों दर्शक — फिर भी संदेश में न कोई देरी, न कोई भ्रम। यही तो है “मजबूत सूचना तंत्र” की पहचान।
कभी सूचनाएं सिर्फ जारी की जाती थीं, अब वे “प्रबंधित” की जाती हैं — और तिवारी ने यह कला दिखा दी। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के दौरान जो तालमेल दिखा, उसने सूचना विभाग को सिर्फ “बैकग्राउंड टीम” नहीं, बल्कि “सफलता का स्तंभ” बना दिया।
सियासी व्यंग्य यह है कि जहां बाकी राज्यों में सूचना विभाग खबरें “ढूंढता” फिरता है, वहीं उत्तराखंड में वह “खबर बन गया”। तिवारी की टीम ने साबित किया कि प्रशासनिक संचार अगर पारदर्शी, तेज और विश्वसनीय हो, तो जनता का भरोसा सरकार की सबसे बड़ी पूंजी बन सकता है।
देहरादून में मंच पर प्रधानमंत्री की आवाज गूंजी, लेकिन उसके पीछे जो सटीक माइक्रोफोन था — वह बंशीधर तिवारी का तंत्र था। अब यह कहना गलत नहीं होगा कि उत्तराखंड में सिर्फ सरकार नहीं, “सूचना” भी मजबूत हुई है।








