
यूपीईएस एनर्जी समिट 2025: ऊर्जा सुरक्षा और कार्बन-मुक्त भविष्य की दिशा में निर्णायक पहल
देहरादून, 11 नवम्बर 2025।
ऊर्जा सुरक्षा, नवाचार और डीकार्बोनाइजेशन के वैश्विक एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए आज यूपीईएस देहरादून में यूपीईएस एनर्जी समिट 2025 का शुभारंभ हुआ। दो दिवसीय इस सम्मेलन में इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन सस्टेनेबल एंड अफोर्डेबल एनर्जी (ICSAE-2025) का आयोजन हाइब्रिड मोड में किया जा रहा है, जिसे अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) का समर्थन प्राप्त है।
साल 2022 से यूपीईएस एनर्जी क्लस्टर द्वारा आयोजित यह समिट अब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं और शोधकर्ताओं का अग्रणी मंच बन चुका है। इस वर्ष सम्मेलन में ऊर्जा उत्पादन, भंडारण, परिवहन और उपयोग से जुड़े लगभग 200 शोध-पत्र प्रस्तुत किए जा रहे हैं।
उद्घाटन सत्र में विश्वसनीयता, वहनीयता और डीकार्बोनाइजेशन पर साक्ष्य-आधारित नीतिगत कदमों की रूपरेखा तय की गई। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी (IRENA), अबू धाबी की डिप्टी डायरेक्टर-जनरल गौरी सिंह रहीं। उन्होंने ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में भारत की भूमिका और वैश्विक सहयोग के महत्व पर अपने विचार साझा किए।
कुलपति डॉ. राम शर्मा ने कहा कि “भारत की ऊर्जा सुरक्षा आने वाले दशक में प्रगति का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ बनने जा रही है। यूपीईएस इस दिशा में शोध, नीति और उद्योग को जोड़ने का काम कर रहा है, ताकि युवा व्यावहारिक समाधान विकसित कर सकें। हमारा लक्ष्य विज्ञान को व्यवहार में बदलना और ऐसे समाधान देना है जो भरोसेमंद, किफायती और स्वच्छ हों।”
इस आयोजन में 100 से अधिक स्कूल विद्यार्थियों ने ‘सस्टेनेबल एंड अफोर्डेबल एनर्जी’ विषय पर मॉडल और पोस्टर प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी भागीदारी दर्ज कराई, जिससे युवा पीढ़ी को ऊर्जा नीति और नवाचार के प्रति प्रोत्साहन मिला।
समिट के दूसरे दिन 12 नवम्बर को सुबह 11:30 से दोपहर 12:30 बजे तक ‘एनर्जी सिक्योरिटी और नेट-ज़ीरो एमिशन: आगे की चुनौतियाँ और अवसर’ विषय पर उच्च स्तरीय पैनल चर्चा आयोजित की जाएगी, जिसमें वरिष्ठ ऊर्जा विशेषज्ञ और प्रशासक निवेश, नवाचार और ऊर्जा तक समावेशी पहुँच जैसे मुद्दों पर विमर्श करेंगे।
भारत की नेट-ज़ीरो 2070 की प्रतिबद्धता और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य के अनुरूप यह समिट स्वच्छ, सुलभ और सतत ऊर्जा की दिशा में ठोस कदम साबित हो रही है। उत्तराखंड की प्राकृतिक संपदाओं—प्रचुर धूप, जल और वन-आधारित बायोमास—के साथ यह आयोजन क्षेत्रीय स्तर पर स्थानीय-आधारित समाधानों को बढ़ावा देने का संदेश दे रहा है, जो राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को सशक्त बनाएंगे और आने वाली पीढ़ियों के लिए संतुलित भविष्य सुनिश्चित करेंगे।








