
“तिवारी के सख्त निर्देश: अब सूचना में रफ्तार भी होगी और सटीकता भी—सुस्ती वालों की खैर नहीं!”
सूचना निदेशालय की बैठक का पूरा माहौल इस बात का संकेत था कि महानिदेशक बंशीधर तिवारी सिर्फ औपचारिक बातें करने वालों में नहीं आते—वे उन अधिकारियों में हैं जिनकी पहचान उनके काम और उसकी गति से होती है। जिस तरह उन्होंने जिला सूचना अधिकारियों को एक-एक बिंदु पर साफ और कड़े निर्देश दिए, वह बताता है कि विभाग को लेकर उनकी सोच कितनी स्पष्ट और पेशेवर है।
दरअसल, सरकार की योजनाएं कागज़ों पर नहीं, जनता तक पहुंचने पर असर दिखाती हैं। तिवारी इसे अच्छे से जानते हैं, इसलिए उनका जोर केवल प्रचार पर नहीं बल्कि सटीक, संतुलित और तथ्य-आधारित संचार पर रहा। उन्होंने साफ कहा कि सोशल मीडिया के इस दौर में गलत या अपुष्ट जानकारी फैलाना विभाग के लिए सबसे बड़ा खतरा है, और जिला स्तर की टीमों को यह बात हमेशा याद रखनी होगी।
दिलचस्प यह है कि तिवारी केवल दिशा नहीं दे रहे, बल्कि सिस्टम को मजबूत करने की तैयारी भी दिखा रहे हैं—चाहे वह विभागीय पुनर्गठन का प्रस्ताव हो, खाली पद भरने की प्रक्रिया हो, या जिला सूचना कार्यालयों के लिए स्थायी भवन की बात। यह साफ संदेश है कि काम तेजी से और बेहतर ढंग से होना चाहिए, बहाने नहीं चलेंगे। तिवारी की शैली यही है—अनावश्यक दिखावे से दूर, सीधे काम की बात और स्पष्ट लक्ष्य।
बैठक में उनकी बातों में एक हल्का-सा व्यंग भी छिपा था—जो लोग अभी भी पुराने ढर्रे पर चलने के अभ्यस्त हैं, उनके लिए यह सीधी चेतावनी थी कि समय बदल चुका है। विभाग को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप ढालना ही होगा। जो सीखना चाहते हैं, वे सीखें; जो बहाने ढूंढते हैं, उनके लिए यह क्लास ‘कठिन’ ही रहने वाली है।
कुल मिलाकर, यह बैठक एक सामान्य सरकारी मीटिंग से कहीं आगे थी। यह एक संदेश था—काम की रफ्तार बढ़नी चाहिए, समन्वय मजबूत होना चाहिए और जनता तक पहुंचने वाली हर जानकारी सटीक और भरोसेमंद होनी चाहिए। और अगर विभाग इसी दिशा में चला, तो इसमें कोई संदेह नहीं कि बंशीधर तिवारी की पहचान सिर्फ एक अधिकारी के तौर पर नहीं, बल्कि एक प्रभावी सिस्टम-मेकर के रूप में और मजबूत होगी।








